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अंडमान-निकोबार पुलिस ने भारत में अब तक की सबसे बड़ी ड्रग्स जब्ती के बाद 36,000 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थों को नष्ट कर दिया। डीजीपी हरगोबिंदर सिंह धालीवाल की देखरेख में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
भस्मीकरण का पर्यावरण-अनुकूल तरीका
नष्ट करने के लिए भस्मीकरण (इन्सिनरेशन) की प्रक्रिया को अपनाया गया। इस प्रक्रिया को प्रदूषण नियंत्रण और सुरक्षित निपटान के लिए सबसे प्रभावी माना गया। डीजीपी धालीवाल ने बताया कि जल निपटान, खुले में जलाने या मिट्टी में दबाने जैसे विकल्पों के बजाय भट्ठी में जलाने से पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचता है।
कैसे पकड़ी गई ड्रग्स?
2024 के आखिरी सप्ताह में भारतीय तटरक्षक डोर्नियर विमान ने बैरन द्वीप के पास एक संदिग्ध मछली पकड़ने वाले जहाज का पता लगाया। जांच में जहाज से 6,016.870 किलोग्राम मेथमफेटामाइन बरामद हुआ, जिसकी बाजार कीमत लगभग 36,000 करोड़ रुपये आंकी गई।
संदिग्ध गिरफ्तार
इस ऑपरेशन में म्यांमार के छह नागरिकों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में क्यान लिन खिंग, ज़ाय यार सो, मो ज़ार ऊ, हेट म्यात आंग, ज़िन मिनसो और खिन एमजी शामिल हैं। सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।
प्राकृतिक न्यायालय से अनुमति और कार्रवाई
3 जनवरी, 2025 को विशेष न्यायालय (एनडीपीएस), श्री विजयपुरम ने जब्त मादक पदार्थ के प्री-ट्रायल निपटान की अनुमति दी। इसके बाद 222 प्लास्टिक बैगों में रखे गए ड्रग्स को सीआईडी इकाई के सेंट्रल स्टोरेज रूम से निकालकर सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया।
अभूतपूर्व सफलता
डीजीपी धालीवाल ने इस सफलता का श्रेय नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, गृह मंत्रालय और स्थानीय अधिकारियों के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा को रिकॉर्ड समय में नष्ट करना संभव हो पाया है।
अंडमान-निकोबार पुलिस का यह कदम मादक पदार्थों के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है।



