कोरिया: पत्रकारों पर खतरा, घटिया सड़क निर्माण के खिलाफ आवाज उठाने पर धमकियां और हत्याएं

एडिटर , भारत न्यूज़ लाइव
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में पत्रकारों पर हमले और धमकियों के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में ठेकेदार के भ्रष्टाचार के खिलाफ खबर दिखाने वाले पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के बाद, एक और मामला सामने आया है। घटिया सड़क निर्माण की खबर कवर करने वाले पत्रकार सुनील शर्मा को भी जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।
पत्रकार को ठेकेदार ने दी धमकी
सुनील शर्मा का आरोप है कि सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार उजागर करने पर ठेकेदार उन्हें दिन में 20-25 बार फोन कर धमकाता है। ठेकेदार ने चेतावनी दी है कि अगर वह शांत नहीं हुए, तो उनका अंजाम भी मुकेश चंद्राकर जैसा होगा।
घटिया सड़क निर्माण का मामला
ग्राम पंचायत गेजी में सेतु विभाग के तहत 5 करोड़ की लागत से सड़क निर्माण हो रहा है। ग्रामीणों और पत्रकार ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में घटिया मटेरियल इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़क पर पर्याप्त गिट्टी और डामर नहीं डाला गया है, जिससे सड़क बनने से पहले ही टूटने लगी है।
ग्रामीणों में रोष
ग्रामीणों ने घटिया निर्माण कार्य की शिकायत की है। उनका कहना है कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है। जब ग्रामीणों ने आवाज उठाई, तो उनके खिलाफ ही झूठे मामले दर्ज करवा दिए गए।
बीजापुर: पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या
बीते दिनों बीजापुर में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने ठेकेदार के भ्रष्टाचार और घटिया सड़क निर्माण की खबर उजागर की थी। ठेकेदार ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाकर हत्या कर दी और शव को सेप्टिक टैंक में डाल दिया। मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया, और आरोपी ठेकेदार को गिरफ्तार कर उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
पत्रकारों और उनके परिवार पर बढ़ता खतरा
सूरजपुर में पत्रकार संतोष टोप्पो के परिवार की हत्या ने भी राज्य में हड़कंप मचा दिया। जमीन विवाद को लेकर उनकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में 23 लोगों को गिरफ्तार किया है।
मांग: दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
ग्रामीणों और पत्रकारों ने घटिया निर्माण की जांच और धमकियां देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पत्रकारों का कहना है कि सरकार को उनके लिए सुरक्षित माहौल बनाना चाहिए।
निष्कर्ष
घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकारों को धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इन घटनाओं ने राज्य में पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पत्रकारों को सुरक्षा का भरोसा जरूरी
बीजापुर और कोरिया की घटनाओं ने पत्रकारिता के पेशे में जोखिम को उजागर किया है। पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या और सुनील शर्मा को मिल रही धमकियों ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वालों को किस हद तक दबाने की कोशिश हो रही है। ग्रामीणों का भी कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर ठेकेदारों और अफसरों की मिलीभगत से न केवल निर्माण कार्य खराब हो रहे हैं, बल्कि सच को सामने लाने वाले लोगों को डराने की रणनीति अपनाई जा रही है।
ग्रामीणों और पत्रकारों का गुस्सा
ग्राम पंचायत गेजी और अन्य स्थानों के ग्रामीणों ने घटिया निर्माण कार्य के खिलाफ जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में भ्रष्टाचार हो रहा है। घटिया सामग्री के उपयोग से सड़कें बनने से पहले ही टूट रही हैं। ग्रामीणों ने अधिकारियों पर कार्रवाई में लापरवाही का भी आरोप लगाया है।
सरकार की भूमिका और सुधार की जरूरत
इन मामलों में सरकारी एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जहां एक ओर मुकेश चंद्राकर के मामले में एसआईटी के गठन और आरोपी ठेकेदार की गिरफ्तारी से कुछ उम्मीदें जगीं, वहीं दूसरी ओर अन्य पत्रकारों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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