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लखनऊ में कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत, सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में मिलेगी हाईटेक सुविधाएं

भारत न्यूज़ लाइव

उत्तर प्रदेश l लखनऊ के कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान में 5 और 9 मंजिलों वाली दो नई इमारतों का निर्माण पूरा हो गया है। इन इमारतों में कुल 350 बेड लगाए जाएंगे, जिन पर कैंसर मरीजों का इलाज किया जा सकेगा। राजकीय निर्माण निगम इन इमारतों को अगले तीन महीने में हैंडओवर कर देगा।

संस्थान में मरीजों के इलाज के लिए 12 डॉक्टरों की संविदा पर नियुक्ति की जाएगी, जिसकी शासन से मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा, माइक्रो वैस्कुलर सर्जरी की शुरुआत भी की जाएगी, जिसके लिए माइक्रो स्कोप की खरीद को मंजूरी मिल चुकी है।

नए विभागों का शिफ्ट होना

कैंसर संस्थान के निदेशक, प्रो. एमएलबी भट्ट के अनुसार, नौ मंजिला इमारत में सर्जिकल ऑन्कॉलजी, हेड ऐंड नेक ऑन्कॉलजी, गाइनी ऑन्कॉलजी, न्यूरो ऑन्कॉलजी और ऑर्थो ऑन्कॉलजी विभागों को शिफ्ट किया जाएगा। इसके साथ ही, रेडियोथेरपी की हाईटेक मशीनों की खरीद की मंजूरी भी मिल चुकी है, जो इस साल आ सकती हैं। 42 बेड की क्रिटिकल केयर मेडिसिन यूनिट तैयार है और इसे मार्च तक शुरू कर दिया जाएगा। संस्थान में 93 शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी, और रेजिडेंट एवं नर्सिंग स्टाफ के लिए 150 आवास तैयार हैं।

माइक्रो वैस्कुलर सर्जरी की शुरुआत

प्रो. गौरव सिंह ने बताया कि इस साल माइक्रो वैस्कुलर सर्जरी की शुरुआत की जाएगी। इस सर्जरी से उन मरीजों को लाभ मिलेगा जिनके शरीर के ऊतक क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और जिन्हें मरम्मत की जरूरत होती है। यह सर्जरी चोट या जन्मजात समस्याओं के कारण होने वाली परेशानियों के इलाज में भी कारगर होगी। इसके अलावा, स्तन, फेफड़ों, मलाशय, आंखों और त्वचा कैंसर के मरीजों का इलाज ब्रेकी थेरपी से शुरू होगा।

कैंसर के मामलों में वृद्धि

बलरामपुर अस्पताल के डॉ. आरके चौधरी के अनुसार, पिछले पांच सालों में पुरुषों में मुंह के कैंसर और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़े हैं। मुंह के कैंसर के अधिकांश मरीज पान मसाला, तंबाकू और हुक्का पीने के आदि होते हैं। डॉ. चौधरी ने ऐसे लोगों को सचेत किया है, जिनके दांत नुकीले होते हैं, क्योंकि इससे मुंह के अंदर की चमड़ी छिल सकती है।

केजीएमयू में पेट के कैंसर का नया इलाज

केजीएमयू में हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरपी (हाईपेक) थेरपी से पेट के कैंसर का इलाज शुरू हो गया है। अब तक यह सुविधा केवल लोहिया संस्थान में ही उपलब्ध थी। केजीएमयू के ऑन्कॉलजी विभाग के प्रमुख प्रो. विजय के अनुसार, हाईपेक तकनीक पेट में फैल चुके कैंसर का प्रभावी इलाज करती है।

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