उत्तराखंडराज्य

देवप्रयाग विधानसभा चुनाव में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, मुकाबला हो सकता है त्रिकोणीय

विक्रम सिंह कठैत ( एडिटर) ,भारत न्यूज़ लाइव

देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। वर्तमान में इस सीट का प्रतिनिधित्व भारतीय जनता पार्टी के विधायक विनोद कंडारी कर रहे हैं, जो लगातार दो बार इस क्षेत्र से विधायक चुने जा चुके हैं। हालांकि आगामी चुनाव में उनके सामने कड़ी चुनौती खड़ी होने के संकेत मिल रहे हैं।

कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री प्रसाद नैथानी को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। प्रसाद नैथानी देवप्रयाग से विधायक रहते हुए उत्तराखंड सरकार में शिक्षा एवं पेयजल मंत्री का दायित्व संभाल चुके हैं और वर्तमान में क्षेत्र में लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। उनकी सक्रियता से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।

वहीं उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राजस्व मंत्री स्वर्गीय दिवाकर भट्ट के निधन के बाद राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है। दिवाकर भट्ट का देवप्रयाग क्षेत्र में व्यापक जनाधार और प्रभाव रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं का रुख आगामी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

सूत्रों के अनुसार यूकेडी भी इस सीट पर मजबूत और प्रभावशाली उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी चल रही है कि स्वर्गीय दिवाकर भट्ट के परिवार के किसी सदस्य को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो देवप्रयाग विधानसभा सीट का मुकाबला और अधिक रोचक तथा त्रिकोणीय हो सकता है।

भाजपा के भीतर भी टिकट को लेकर कई दावेदार सक्रिय हैं। इनमें दुग्ध संघ के पूर्व अध्यक्ष महिपाल बुटोला तथा भाजपा सरकार में योजना आयोग के सदस्य रह चुके वरिष्ठ नेता जय सिंह कठैत प्रमुख रूप से शामिल हैं। जय सिंह कठैत लंबे समय से भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं तथा स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी बहू श्रीमती कल्पना कठैत पूर्व में कीर्तिनगर नगर पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं। जय सिंह कठैत भी क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क कर अपनी दावेदारी को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

देवप्रयाग विधानसभा चुनाव में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
जयसिंह कठैत

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा द्वारा टिकट वितरण, कांग्रेस की रणनीति तथा यूकेडी के उम्मीदवार चयन पर इस सीट का चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करेगा। विशेष रूप से स्वर्गीय दिवाकर भट्ट के समर्थकों और पारंपरिक वोट बैंक का झुकाव किस ओर जाता है, यह चुनाव का महत्वपूर्ण कारक बन सकता है।

कुल मिलाकर देवप्रयाग विधानसभा सीट इस बार उत्तराखंड की सबसे चर्चित और प्रतिष्ठापूर्ण सीटों में से एक बनती नजर आ रही है। सभी प्रमुख दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं और आने वाले समय में यहां का राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म होने की संभावना है। अब सभी की निगाहें राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं।

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