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जनपद बागेश्वर में संभावित वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन विभाग, पुलिस, तहसील प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वनाग्नि की घटनाओं में लापरवाही या संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927, वन (संरक्षण) अधिनियम 1980, भारतीय दंड संहिता की धारा 285 एवं 336 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वनाग्नि अधिकांशतः मानवीय लापरवाही का परिणाम होती है और इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।
डीएम ने निर्देश दिए कि सभी संवेदनशील गांवों में अनिवार्य रूप से वनाग्नि प्रबंधन समितियों का गठन किया जाए और नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर गोष्ठियां एवं जनजागरूकता अभियान संचालित किए जाएं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में भूमि में कम आर्द्रता के कारण वनाग्नि की संभावना बढ़ गई है, इसलिए तहसील स्तरीय टीमें पूर्ण सतर्कता बरतें। फायर वॉचर्स की भूमिका महत्वपूर्ण है और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रभागीय वनाधिकारी आदित्य रत्ना ने वनाग्नि नियंत्रण के लिए उपलब्ध शमन उपकरणों एवं संसाधनों की जानकारी दी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अग्निशमन कर्मियों की सुरक्षा सर्वोपरि रहे और उपकरणों की खरीद उच्च गुणवत्ता के साथ नियमानुसार की जाए। साथ ही वन विभाग को क्रू स्टेशनों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में बताया गया कि वन विभाग द्वारा कंट्रोल बर्निंग, नुक्कड़ नाटक, मॉक ड्रिल एवं जनजागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग को सड़कों के किनारे झाड़ियों की नियमित कटाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि आग के फैलाव को रोका जा सके।
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