उत्तराखंडभगवानपुरलालवाला खालसाहरिद्वार

बाल विवाह रोके जाने हेतु ग्रामीण स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक संपन्न, कार्यशाला का भी हुआ आयोजन l

भगवानपुर l 11 मार्च 2026 को बाल विकास परियोजना अधिकारी भगवानपुर के निर्देशानुसार नवीन जन कल्याण संस्थान द्वारा ग्राम लालवाला खालसा एवं सामंतशेर के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के संबंध में एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना तथा इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना था, ताकि समाज में इस कुप्रथा को समाप्त करने की दिशा में ठोस पहल की जा सके।


ग्राम लालवाला खालसा
ग्राम लालवाला खालसा

कार्यक्रम के दौरान नवीन जन कल्याण संस्थान के सचिव नवीन चंद्र कुरील ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाल विवाह न केवल बच्चों के अधिकारों का हनन करता है, बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। कम आयु में विवाह होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है और उनका भविष्य भी अनिश्चित हो जाता है। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह बाल विवाह जैसी कुरीति को समाप्त करने में सक्रिय भूमिका निभाए।

सामंतशेर
सामंतशेर

नवीन चंद्र कुरील ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। यदि इससे कम आयु में विवाह कराया जाता है तो यह कानूनन अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में विवाह कराने वाले अभिभावकों, आयोजकों तथा विवाह संपन्न कराने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को दो वर्ष तक का कारावास, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दें, ताकि समय रहते उसे रोका जा सके।

कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह के दुष्परिणामों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि बाल विवाह के कारण बालिकाओं को कम उम्र में ही कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कम आयु में परिवार की जिम्मेदारी आने से उनका मानसिक विकास भी प्रभावित होता है। इसलिए बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने और अपने जीवन के बारे में सही समय पर निर्णय लेने का अवसर मिलना चाहिए।

कार्यशाला के अंत में नवीन चंद्र कुरील द्वारा उपस्थित लोगों को बाल विवाह रोकने के लिए शपथ दिलाई गई। उन्होंने सभी से यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्र में बाल विवाह नहीं होने देंगे तथा लोगों को इसके प्रति जागरूक करेंगे।

इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, पूनम , निर्देश कुमारी एव सहायिकाएं तथा रौनक जहाँ, सादिया, सालिम , महक , नाजिश , सरिता , मोसिना, शान्या , गुड्डो , आयशा, आलिम , इशरत, शादिया, एवं स्थानीय महिलाएं एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और सभी ने बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

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