श्रमिकों की समस्याओं को लेकर TUCC का कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन, मांगों का ज्ञापन सौंपा l

भारत न्यूज़ लाइव
पिथौरागढ़। ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC) के राष्ट्रीय आवाहन पर 13 मार्च 2026 को न्यायलय कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट पिथौरागढ़ में श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर एक दिवसीय धरना एवं प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रमिकों और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लेकर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।

धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि श्रमिक वर्ग आज कई मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। रोजगार की सुरक्षा, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ तथा श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि श्रमिकों की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस दौरान श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भी भेजा गया।

ज्ञापन में प्रमुख रूप से ESIC और EPFO की वेतन सीमा बढ़ाने, आशा, आंगनवाड़ी व मिड-डे मील वर्कर्स को न्यूनतम वेतन देने, निर्माण मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने, मनरेगा श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन घोषित करने तथा श्रमिकों को मिलने वाली DBT, वेज लॉस और अन्य योजनाओं का लाभ समय पर देने की मांग की गई।
इसके अलावा श्रमिक सुविधा केंद्रों की कार्यप्रणाली में सुधार, पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने, ESIC और EPFO का लाभ सभी श्रमिकों को उपलब्ध कराने, श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट उपलब्ध कराने तथा मृत्युपरांत सहायता में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई।

कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संगठन लगातार संघर्ष करता रहेगा।
इस अवसर पर प्रेम राम, अनिल कुमार, नरेश राम, प्रीति धामी, गिरीश जोशी, सुरेश कसनियाल, दिनेश आर्य, बिंदिया, सुनीता, कमला, गंगा पाटनी, राजीव डुंगरियाल सहित अनेक श्रमिक और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कार्यक्रम का नेतृत्व अर्जुन धोनी, प्रदेश उपाध्यक्ष TUCC उत्तराखंड ने किया। उन्होंने श्रमिकों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।
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