उत्तरप्रदेशकानपुर

125 साल पुराना पुल गंगा में समा गया: क्या ब्रिटिशकाल का ये पुल दे रहा था तबाही का संकेत?

भारत न्यूज़ लाइव

कानपुर (उत्तर प्रदेश), 26 नवंबर: उत्तर प्रदेश के शुक्लागंज इलाके में गंगा नदी पर बना 125 साल पुराना पुल 25 नवंबर की रात ढह गया। यह पुल ब्रिटिश शासन के दौरान बनाया गया था और अपनी ऐतिहासिक संरचना के लिए जाना जाता था। हालांकि, पुल की जर्जर स्थिति के कारण इसे तीन साल पहले बंद कर दिया गया था, जिससे इस हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि पुल के ढहने का कारण रात में गुजरने वाली ट्रेन का प्रभाव हो सकता है। उन्होंने कहा, “यह पुल पहले ही क्षतिग्रस्त था, लेकिन ट्रेन की हलचल ने इसे गिरने के लिए मजबूर कर दिया।” पुल के टूटने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और प्रशासन मौके पर पहुंचा।

2021 में दिखे थे खतरे के संकेत
अप्रैल 2021 में पुल पर पहली बार बड़े पैमाने पर दरारें देखी गई थीं। खासकर, कानपुर की ओर के पियर्स 2, 10, 17 और 22 में गंभीर क्षति के संकेत मिले थे। इस स्थिति को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने दिल्ली से वैज्ञानिकों की एक टीम को बुलाया था। उनकी रिपोर्ट ने पुल को यातायात के लिए अनुपयुक्त घोषित किया।

रिपोर्ट के अनुसार, पुल की मरम्मत पर अनुमानित खर्च ₹29.5 करोड़ था। लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इसे पुनर्निर्माण के बजाय स्थायी रूप से बंद करना उचित समझा। पुल के दोनों छोर पर बैरिकेड्स और कंक्रीट की दीवारें लगाकर इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया। शुरुआती दिनों में केवल पैदल चलने वालों को अनुमति दी गई, लेकिन पुल की स्थिति बिगड़ने पर इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया।

इतिहास का अंत या पुनर्निर्माण की शुरुआत?
ब्रिटिश काल में बना यह पुल गंगा नदी के ऊपर एक ऐतिहासिक धरोहर था, लेकिन इसका ढहना विकास और सुरक्षा के बीच संघर्ष की ओर इशारा करता है। पुल के टूटने से एक सवाल उठता है—क्या प्रशासन इसे धरोहर के रूप में पुनर्निर्मित करेगा या इसे इतिहास का एक भूला हुआ अध्याय मानकर छोड़ देगा?

स्थानीय प्रशासन ने घटना के बाद इलाके को पूरी तरह से सुरक्षित कर लिया है और अब इसे हटाने और साफ-सफाई के लिए नई योजना बनाई जा रही है। इस ऐतिहासिक पुल के अंत ने क्षेत्र में एक खालीपन छोड़ दिया है, लेकिन यह भविष्य की संरचनाओं के लिए एक सबक भी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *