
एडिटर, भारत न्यूज लाइव
नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने विधि मंत्रालय को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को अपने उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया है। सीजेआई चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2024 को सेवानिवृत्त होंगे। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद, न्यायमूर्ति खन्ना भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश बन जाएंगे। उनका कार्यकाल 6 महीने का होगा और वह 13 मई 2025 को सेवानिवृत्त होंगे।
प्रमुख न्यायिक फैसलों में न्यायमूर्ति खन्ना की भागीदारी
न्यायमूर्ति खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसले दिए हैं। वह उस बेंच का हिस्सा थे, जिसने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी थी। इसके अलावा, उन्होंने दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को ईडी केस में अंतरिम जमानत प्रदान की थी।
अनुच्छेद 370 और चुनावी बॉन्ड योजना पर न्यायमूर्ति खन्ना की भूमिका
न्यायमूर्ति खन्ना संविधान पीठ का भी हिस्सा रहे हैं, जिसने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा। वह उस पीठ का भी हिस्सा थे, जिसने 2018 की चुनावी बॉन्ड योजना को निरस्त करने का निर्णय लिया था।
न्यायमूर्ति खन्ना का करियर और उपलब्धियां
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन किया था। उन्होंने संवैधानिक कानून, कराधान, मध्यस्थता, वाणिज्यिक कानून और अन्य विविध क्षेत्रों में लंबे समय तक वकालत की। इसके साथ ही, उन्होंने आयकर विभाग के वरिष्ठ स्थायी वकील और दिल्ली हाईकोर्ट के स्थायी वकील (सिविल) के रूप में सेवाएं दीं।
2005 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया, और 2006 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। उन्होंने दिल्ली न्यायिक अकादमी और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र के अध्यक्ष का पद भी संभाला। 2019 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था।
विधिक सेवा और न्यायिक अकादमियों में योगदान
न्यायमूर्ति खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष के रूप में 2023 में कार्य किया। वर्तमान में, वह राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य हैं।


