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उत्तराखंड l रुद्रप्रयाग जिले में शनिवार सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.06 दर्ज की गई। झटके सुबह करीब 5:02 बजे महसूस किए गए, जिसके बाद कई लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकल आए। जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र रुद्रप्रयाग से लगभग 10 किलोमीटर पूर्व दिशा में स्थित था और इसकी गहराई जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। झटकों की अवधि लगभग 10 से 15 सेकंड रही, हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में अब तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।
भूकंप आने का मुख्य कारण पृथ्वी के भीतर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि होती है। पृथ्वी की सतह कई बड़ी प्लेटों में बंटी हुई है, जो लगातार गतिशील रहती हैं। जहां ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या रगड़ खाती हैं, उस क्षेत्र को फॉल्ट लाइन कहा जाता है। समय के साथ इन प्लेटों पर दबाव बढ़ता जाता है और जब यह दबाव अधिक हो जाता है, तो प्लेटें अचानक खिसक जाती हैं या टूट जाती हैं, जिससे ऊर्जा का उत्सर्जन होता है और भूकंप के रूप में झटके महसूस किए जाते हैं।
भूकंप के केंद्र, जिसे एपिसेंटर कहा जाता है, वह स्थान होता है जहां पृथ्वी के अंदर ऊर्जा का उत्सर्जन सबसे पहले होता है और इसके ठीक ऊपर जमीन पर सबसे अधिक कंपन महसूस किया जाता है। जैसे-जैसे हम इस केंद्र से दूर जाते हैं, कंपन की तीव्रता कम होती जाती है। हालांकि यदि भूकंप की तीव्रता अधिक हो, जैसे कि रिक्टर स्केल पर 7 या उससे ज्यादा, तो इसका प्रभाव काफी बड़े क्षेत्र में महसूस किया जा सकता है।
भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का उपयोग किया जाता है, जिसे रिक्टर स्केल कहा जाता है। इस पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 1 से 9 या उससे अधिक तक मापी जाती है। यह स्केल भूकंप के दौरान निकलने वाली ऊर्जा की मात्रा को दर्शाता है। जितनी अधिक तीव्रता होगी, उतना ही अधिक नुकसान होने की संभावना रहती है। इस प्रकार, भूकंप की तीव्रता और उसके केंद्र के आधार पर उसके प्रभाव और संभावित खतरे का आकलन किया जाता है।
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