मधुबन आश्रम विवाद: ट्रस्ट ने लगाए गंभीर आरोप, संपत्ति सुरक्षा हेतु मांगी कानूनी संरक्षण l

नवीन चन्द्र ( चीफ एडिटर, भारत न्यूज़ लाइव )
ऋषिकेश (टिहरी गढ़वाल)। एक पंजीकृत सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा संचालित मधुबन आश्रम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ट्रस्ट ने कुछ पूर्व कर्मचारियों और स्वयंसेवकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए आश्रम की संपत्ति और प्रशासन में अवैध हस्तक्षेप का मामला उठाया है तथा न्यायालय से संरक्षण की मांग की है।
ट्रस्ट के अनुसार, इसकी स्थापना धार्मिक एवं जनकल्याणकारी उद्देश्यों के लिए की गई थी, जिनमें श्रीकृष्ण भक्ति का प्रचार-प्रसार, मंदिरों की स्थापना, शैक्षिक व चिकित्सा संस्थानों का संचालन और समाज सेवा शामिल हैं। ट्रस्ट ने बताया कि ऋषिकेश के मुनि की रेती स्थित मधुबन आश्रम की संपत्ति 8 जनवरी 1988 को विधिवत पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से खरीदी गई थी। इसके बाद 26 अक्टूबर 1990 को सक्षम प्राधिकारी के आदेश के तहत यह संपत्ति सार्वजनिक ट्रस्ट रजिस्टर में दर्ज की गई।
ट्रस्ट ने आश्रम परिसर में मंदिर का निर्माण कराया, जिसमें श्री श्री राधा-गोविंद जी की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। साथ ही, श्रद्धालुओं के लिए गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं भी विकसित की गईं।
बताया गया है कि 1990 के दशक के मध्य में कुछ ट्रस्टियों के बीच आध्यात्मिक मतभेद को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। उस दौरान एक गुरु को सीमित उद्देश्य के लिए मध्यस्थ बनाया गया, लेकिन वर्ष 1995 में जारी कुछ पत्रों के माध्यम से कुछ ट्रस्टियों को अयोग्य घोषित करने के प्रयास को बहुमत ने अस्वीकार कर दिया। इस आधार पर दायर मुकदमा वर्ष 2008 में अव्यवहारिक मानते हुए खारिज कर दिया गया था, जबकि इसके खिलाफ दायर अपील मार्च 2026 में वापस ले ली गई, जिससे वर्तमान ट्रस्टियों की स्थिति और मजबूत हो गई।
ट्रस्ट का आरोप है कि कुछ पूर्व कर्मचारी और स्वयंसेवक लंबे समय से आपसी मिलीभगत से ट्रस्ट के अधिकारों के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं। आंतरिक जांच में वित्तीय अनियमितताएं, अनधिकृत लेन-देन और आश्रम के कुप्रबंधन के मामले सामने आए, जिसके चलते वर्ष 2019 में एफआईआर संख्या 103 दर्ज कराई गई। इस मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा आपराधिक धाराओं में कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
इसके बावजूद संबंधित व्यक्तियों द्वारा वर्ष 2022 में एक कथित रूप से भ्रामक और मनगढ़ंत सिविल मुकदमा दायर किया गया, जिसमें यह दावा किया गया कि आश्रम ट्रस्ट की संपत्ति नहीं बल्कि सीधे देवी-देवता की है। फिलहाल इस मामले की कार्यवाही उत्तराखंड हाईकोर्ट में लंबित याचिका के तहत स्थगित है।
ट्रस्ट ने आगे आरोप लगाया कि आश्रम में व्यवस्थित रूप से कुप्रबंधन किया जा रहा है। वित्तीय रिकॉर्ड का रखरखाव नहीं किया जा रहा, दान और गेस्ट हाउस से होने वाली आय को छिपाया जा रहा है, बिना वैध अनुबंध के रेस्टोरेंट संचालित किया जा रहा है और कर्मचारियों व श्रद्धालुओं का उचित रिकॉर्ड भी नहीं रखा जा रहा है। इतना ही नहीं, ट्रस्टियों को आश्रम के प्रशासन से दूर रखा जा रहा है।
ट्रस्ट के अनुसार, संबंधित व्यक्तियों ने “नव मधुबन आश्रम ट्रस्ट” नाम से एक समानांतर और अवैध संस्था भी बना ली है, जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं को भ्रमित कर चंदा इकट्ठा कर उसे अघोषित बैंक खातों में जमा किया जा रहा है। इस संबंध में मुंबई के खार थाने और मुनि की रेती थाने में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है, जिसकी जांच जारी है।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ट्रस्ट ने 2 फरवरी 2026 को एक प्रस्ताव पारित कर काउंसिल ऑफ मैनेजमेंट का गठन किया और संबंधित व्यक्तियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया।
ट्रस्ट का कहना है कि मौजूदा स्थिति में आश्रम की संपत्ति को हानि, अवैध हस्तांतरण और दुरुपयोग का गंभीर खतरा बना हुआ है। इसलिए न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि उक्त व्यक्तियों को ट्रस्ट के कार्यों में हस्तक्षेप से रोका जाए और आश्रम की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक कदम उठाए जाएं। आरोपित व्यक्ति प्रेम प्रकाश राणा उर्फ परमानंद दास , हर्ष कुमार कौशल ,सुनील कुमार शर्मा , श्याम सुंदर दास है l यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और आने वाले समय में इसके और भी महत्वपूर्ण पहलू सामने आ सकते हैं।
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