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अल्मोड़ा: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार राज्य की मूल भावना के विपरीत कार्य कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से मुख्यमंत्री पुष्कर धामी और उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत पर आरोप लगाया कि वे केवल घोषणा करने तक सीमित हैं, जबकि वास्तविक कार्यवाही का कोई अता-पता नहीं है।
संस्थानों के बंद होने की चिंता: कुंजवाल ने बताया कि पहाड़ों में कांग्रेस के शासन में स्थापित संस्थानों को बंद करने की कोशिशें की जा रही हैं। उदाहरण के तौर पर, जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र में सलाम जैंती में वानिकी प्रशिक्षण संस्थान को बंद कर हल्द्वानी स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके अलावा, सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े राजकीय पॉलिटेक्निक के सिविल इंजीनियरिंग ट्रेड को भी समाप्त कर दिया गया है। कुंजवाल ने यह भी उल्लेख किया कि 1996 में उन्होंने इसी क्षेत्र में एक राजकीय महाविद्यालय की स्थापना की थी, जिसमें पहले कला और वाणिज्य विषयों की मान्यता थी, और बाद में 2012 से 2017 के बीच विज्ञान की मान्यता भी मिली।
विज्ञान प्रयोगशाला का मामला: कुंजवाल ने बताया कि जब भाजपा की सरकार आई, तब उन्होंने विज्ञान प्रयोगशाला भवन के निर्माण की मांग की, लेकिन अब तक यह नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री ने जैंती में आकर इसकी घोषणा की थी, लेकिन धनराशि की अनुपस्थिति के कारण कोई प्रगति नहीं हुई है। वर्तमान में प्रयोगशाला नहीं होने का बहाना बनाकर इस विषय को स्थानांतरित करने का शासनादेश जारी किया गया है।
आंदोलन की योजना: कुंजवाल ने 25 अक्टूबर को जैंती स्थित भारत माता मंदिर में 24 घंटे का उपवास रखने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस दौरान वे आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार करेंगे और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे।


