बढ़ते साइबर फ्रॉड का नया तरीका: ‘डिजिटल अरेस्ट’

भारत न्यूज़ लाइव
नई दिल्ली: हाल ही में, प्रसिद्ध उद्योगपति एस पी ओसवाल के साथ 7 करोड़ रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने उन्हें बताया कि वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ हो गए हैं और इसके प्रमाण के तौर पर एक नकली वर्चुअल कोर्ट रूम भी स्थापित किया। उन्होंने पैसे को अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कराने के लिए फर्जी सीबीआई और नकली चीफ जस्टिस के ऑर्डर पेश किए।
पत्रकार की 1.86 करोड़ रुपये की हानि
इसी तरह की एक घटना में, दिल्ली के एक 50 वर्षीय पत्रकार को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के चलते 1.86 करोड़ रुपये गंवाने पड़े। इसके अतिरिक्त, अहमदाबाद की एक 27 वर्षीय महिला को भी साइबर अपराधियों ने 5 लाख रुपये की जबरन वसूली के लिए वेबकैम पर कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया।
डिजिटल अरेस्ट क्या है?
डिजिटल अरेस्ट के दौरान, अपराधी ऑडियो या वीडियो कॉल के माध्यम से फर्जी अधिकारियों के रूप में पीड़ितों को डराते हैं। वे उन्हें यह कहते हुए मजबूर करते हैं कि उनकी गिरफ्तारी हो गई है और पैसे की मांग करते हैं। गृह मंत्रालय ने मार्च 2024 में इस मुद्दे पर प्रेस विज्ञप्ति जारी कर लोगों को सचेत किया था, जिसमें बताया गया था कि अपराधी विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों का रूप धारण करके लोगों को ब्लैकमेल कर रहे हैं।
ठगों के द्वारा चूना कैसे लगाया जाता है
अपराधी अक्सर पीड़ितों से संपर्क कर उन्हें यह बताते हैं कि उन्होंने अवैध सामान जैसे ड्रग्स या नकली पासपोर्ट भेजा है या प्राप्त किया है। कुछ मामलों में, वे यह भी आरोप लगाते हैं कि पीड़ित का करीबी किसी अपराध में शामिल है और अब हिरासत में है। ऐसे में, पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाते हुए पैसे की मांग की जाती है।
सरकार की चेतावनी
गृह मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं होती, फिर भी शिक्षित लोग भी इन ठगों का शिकार हो रहे हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने भी इस विषय पर चेतावनी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि सीबीआई, पुलिस या ईडी वीडियो कॉल पर किसी को भी गिरफ्तार नहीं करते हैं।
शिकायत कैसे करें
अगर कोई व्यक्ति इस तरह के धोखाधड़ी कॉल का शिकार होता है, तो उसे तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करनी चाहिए। इसके अलावा, गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है। स्थानीय पुलिस स्टेशन से भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
जागरूकता अभियान की आवश्यकता
सैट्रिक्स इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी लिमिटेड के कंट्री मैनेजर मोहन मदवाचर ने इस बात पर जोर दिया कि अपराधी ‘जेल’, ‘पुलिस स्टेशन’ और ‘गिरफ्तारी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके पीड़ितों के डर का फायदा उठाते हैं। उन्होंने इन ठगों से निपटने के लिए व्यापक जागरूकता अभियानों की आवश्यकता पर भी बल दिया।


