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सोशल मीडिया पर अटके बच्चे: लत से बिगड़ता मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, माता-पिता के लिए चेतावनी

भारत न्यूज़ लाइव


1. शोध के चौंकाने वाले खुलासे: हर तीसरा बच्चा सोशल मीडिया की लत में फंसा

द टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की एक रिपोर्ट में प्रकाशित लैंसेट के शोध से खुलासा हुआ है कि एक-तिहाई बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स पर अत्यधिक समय बिता रहे हैं। यह सिर्फ एक साधारण स्क्रॉलिंग नहीं है, बल्कि वे लगातार लाइक्स गिन रहे हैं और बेतहाशा रील्स देख रहे हैं। और भी चिंता की बात यह है कि 11% बच्चे सोशल मीडिया की लत के संकेत दिखा रहे हैं, जैसे स्क्रीन टाइम न मिलने पर बेचैनी या घबराहट महसूस करना।


2. मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर: डॉक्टरों ने किया चेतावनी जारी

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 15 वर्षों में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और आत्म-हानि के मामलों में भी वृद्धि हुई है। TOI की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने माता-पिता को सतर्क करते हुए कहा है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करना और उनका मार्गदर्शन करना अत्यंत आवश्यक है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।


3. डॉक्टरों का सुझाव: माता-पिता और स्कूलों की भूमिका महत्वपूर्ण

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत गोयल ने माता-पिता से अनुरोध किया कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें और उनके सोशल मीडिया उपयोग की निगरानी करें। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और बच्चों को डिजिटल मीडिया का विवेकपूर्ण उपयोग सिखा सकते हैं।


4. सोशल मीडिया लत के लिए विशेष क्लिनिक शुरू: अनुशासन सिखाने की आवश्यकता

पीएसआरआई इंस्टीट्यूट ऑफ पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ. जी.सी. खिन्नानी ने कहा कि बच्चों में अनुशासन सिखाना जरूरी है ताकि वे शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ रह सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया की लत इतनी व्यापक हो गई है कि इसके लिए विशेष उपचार क्लिनिक स्थापित हो रहे हैं।


5. सोशल मीडिया और नींद: स्वास्थ्य पर गहरा असर

नींद की कमी भी एक बड़ी चिंता का विषय बन रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, वयस्कों को कम से कम सात घंटे की निरंतर नींद की आवश्यकता होती है। नींद की कमी से ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, ज्यादा भोजन करना और कैफीन या अन्य पदार्थों का अधिक उपयोग करने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। सोशल मीडिया से जुड़ाव बनाए रखने के लिए देर रात तक जागने के कारण खासकर किशोरों में नींद का संकट बढ़ रहा है, जो हृदय रोग, मधुमेह, स्ट्रोक और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है।

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