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नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से 20 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें 21 बैठकें होंगी। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को इस सत्र की जानकारी दी। इस बार का सत्र संविधान सभा द्वारा संविधान के मसौदे को स्वीकार किए जाने के 75वें वर्ष का उत्सव भी है।
26 नवंबर को संविधान दिवस पर विशेष समारोह
26 नवंबर, जो भारत में संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है, इस बार विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह भारतीय संविधान की 75वीं वर्षगांठ है। संविधान 26 जनवरी 1950 को प्रभावी हुआ था। 2015 में, मोदी सरकार ने संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर के 125वें जन्मदिन के अवसर पर इसे संविधान दिवस घोषित किया था, जबकि पहले इसे राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में मनाया जाता था।
सत्र में प्रमुख विधेयक और अहम मुद्दे
इस सत्र के दौरान वक्फ (संशोधन) विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। इस विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों के बाद इसे प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके साथ ही, भारत-चीन पूर्वी लद्दाख में सेनाओं के हटाने की प्रगति पर भी सरकार संसद को जानकारी दे सकती है।
विधानसभा चुनावों के नतीजों का असर
महाराष्ट्र और झारखंड में आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजे संसद सत्र के दौरान सरकार के विधायी एजेंडे पर भी प्रभाव डाल सकते हैं। यदि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इन राज्यों में जीत दर्ज करती है, तो इसका असर उनके विधायी प्रस्तावों पर सकारात्मक रूप से दिख सकता है। लेकिन, भाजपा की हार की स्थिति में विपक्षी दलों द्वारा महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चाएं बढ़ाई जा सकती हैं।


