देशनई दिल्ली

संविधान के सहारे भारत बना लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ और वैश्विक नेता: CJI संजीव खन्ना

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने मंगलवार को कहा कि भारत ने एक जीवंत लोकतंत्र और भू-राजनीतिक नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जिसमें देश के संविधान की भूमिका अहम रही है। उन्होंने कहा कि विभाजन के दर्द और गरीबी से जूझते एक अनपढ़ राष्ट्र से लेकर आज आत्मविश्वासी नेता बनने तक भारत का यह परिवर्तन संविधान की वजह से संभव हुआ है।

संविधान: जीवन जीने का तरीका
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा आयोजित संविधान दिवस कार्यक्रम में न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, “संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि यह आज एक जीवन शैली बन चुका है।” उन्होंने बार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि मजबूत बार का मतलब बेहतर न्यायपालिका है।

संविधान दिवस का महत्व
2015 से हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है, जो 1949 में संविधान सभा द्वारा संविधान को अपनाने की याद दिलाता है। इससे पहले, इसे “कानून दिवस” के रूप में मनाया जाता था।

बार और न्यायपालिका का अटूट रिश्ता
सीजेआई ने अपने संबोधन में कहा, “न्यायपालिका केवल न्यायाधीशों तक सीमित नहीं है। इसमें बार के सदस्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। न्यायाधीश बार से आते हैं और बार में लौटते हैं। बेहतर बार का मतलब बेहतर न्यायिक फैसले।”

सुप्रीम कोर्ट की उपलब्धियां और सुधार
सीजेआई ने सुप्रीम कोर्ट की विरासत को याद करते हुए कहा कि पर्यावरण कानून, निजता अधिकार, मौलिक अधिकार और “मूल संरचना सिद्धांत” जैसे ऐतिहासिक फैसले बार और न्यायपालिका के संयुक्त प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने बार सदस्यों की समस्याओं के समाधान के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया, जैसे कोर्टरूम के बाहर नोटिस बोर्ड लगाना और बेहतर वाई-फाई सेवाएं प्रदान करना।

नए सिस्टम की सराहना
उन्होंने कोर्ट में स्थगन पत्रों की संख्या घटाने के लिए अपनाए गए नए सिस्टम की तारीफ की। उन्होंने बताया कि पहले हर तीन महीने में 9,000 से 10,000 पत्र आते थे, जबकि अब यह संख्या हर महीने 150 तक सिमट गई है।

संविधान दिवस पर आत्मनिरीक्षण का आह्वान
न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, “आज का दिन आत्मनिरीक्षण करने का है। हमें अपने मजबूत पक्ष और कमजोरियों को पहचानना होगा। बार और न्यायपालिका को मिलकर इन चुनौतियों का समाधान करना होगा।”

संविधान के प्रति इस सम्मान और भारत के न्यायिक तंत्र में बार की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने संविधान दिवस को देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया।

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