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नई दिल्ली: केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में एक सवाल के जवाब में न्यायपालिका में रिक्तियों की स्थिति पर अपडेट दिया। उनके अनुसार, वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 2, हाई कोर्ट में 364 और जिला अदालतों में 5,245 रिक्तियाँ हैं।
हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया
मंत्री ने बताया कि हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 द्वारा शासित होती है, जिसमें कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच निरंतर और सहयोगात्मक प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया में केंद्रीय और राज्य स्तर पर विभिन्न संवैधानिक प्राधिकृत निकायों से परामर्श और स्वीकृति की आवश्यकता होती है।
रिक्तियों के कारण
मेघवाल ने कहा कि हाई कोर्ट में रिक्तियाँ अक्सर सेवानिवृत्तियों, इस्तीफों, न्यायाधीशों की पदोन्नति और न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में बदलाव के कारण उत्पन्न होती हैं, हालांकि इन पदों को भरने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला और अधीनस्थ अदालतों में नियुक्ति का जिम्मा राज्य सरकारों पर
जिला और अधीनस्थ अदालतों में रिक्त पदों को भरने की जिम्मेदारी संबंधित उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों पर है। राज्य सरकारें उच्च न्यायालयों के साथ मिलकर इन पदों के लिए नियम और प्रक्रिया तय करती हैं, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 309, 233 और 234 में वर्णित है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नियुक्तियों की प्रक्रिया
जनवरी 2007 में मलिक मजार सुलतान मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए विशेष समयसीमा तय की थी। इसका उद्देश्य न्यायपालिका में रिक्तियों को जल्दी भरने की दिशा में काम करना है।
आगे का रास्ता
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इन रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया में गति लाने के लिए सरकार और न्यायपालिका को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।


