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नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ प्री-बजट परामर्श के दौरान, किसानों और कृषि प्रतिनिधियों ने कृषि ऋण पर ब्याज दर 1% तक घटाने, पीएम-किसान योजना की वार्षिक सहायता को ₹6,000 से ₹12,000 करने और जीरो प्रीमियम फसल बीमा लागू करने की मांग की।
बैठक में कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर गहन चर्चा हुई, जिसमें वित्तीय सहायता, बाजार सुधार और लक्षित निवेश पर जोर दिया गया।
मुख्य मांगें:
- कृषि ऋण पर ब्याज दर घटाकर 1% करना।
- पीएम-किसान की वार्षिक सहायता ₹12,000 तक बढ़ाना।
- छोटे किसानों के लिए जीरो प्रीमियम फसल बीमा।
- कृषि यंत्र, खाद, बीज और दवाइयों पर जीएसटी छूट।
- कीटनाशकों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% करना।
भारत कृषक समाज के अध्यक्ष अजय वीर जाखड़ ने कहा कि केंद्रित निवेश और बाजार सुधारों से कृषि उत्पादकता और किसान कल्याण में वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने चना, सोयाबीन, और सरसों जैसी फसलों पर ₹1,000 करोड़ वार्षिक निवेश की योजना का सुझाव दिया।
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत व्यापक बदलाव की मांग की, जिसमें किराया, मजदूरी, और कटाई के बाद के खर्चों को शामिल किया जाए।
अन्य प्रमुख सुझाव:
- एमएसपी से कम दरों पर आयात की अनुमति न देना।
- कृषि मशीनरी की कीमतें कंपनियों की वेबसाइट पर सार्वजनिक करना।
- एमएसपी कवरेज को 23 फसलों से आगे बढ़ाना।
कुछ ने कृषि को समवर्ती सूची में शामिल करने और एक केंद्रीय भारतीय कृषि सेवा की स्थापना जैसे संवैधानिक सुधारों की भी मांग की।
बैठक में वित्त और कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, किसान उत्पादक कंपनियों और कृषि संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।


