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भारत में चीनी उत्पादन अगले विपणन वर्ष (अक्टूबर 2025 से) में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की संभावना है, क्योंकि लाखों किसानों ने गन्ने की खेती का रकबा बढ़ा दिया है। इसका मुख्य कारण पर्याप्त पानी की उपलब्धता और अन्य फसलों के अपेक्षाकृत कम लाभ हैं। इस उत्पादन वृद्धि के चलते भारत 2025-26 में दोबारा चीनी का निर्यात शुरू कर सकता है।
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के किसान अमर चव्हाण के अनुसार, “पिछले साल पानी की कमी के कारण गन्ना नहीं बोया जा सका, लेकिन इस साल अच्छी बारिश के कारण सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध है।” राज्य में उज्जानी डैम जैसे जलाशय 100% भर चुके हैं, जबकि पिछले साल यह क्षमता केवल 25% थी।
महाराष्ट्र और कर्नाटक, जो देश के कुल चीनी उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा देते हैं, में इस साल औसत से 39% अधिक बारिश हुई। यह स्थिति गन्ने की खेती के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रही है।
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे ने कहा, “किसान बड़े पैमाने पर गन्ना बोने में जुटे हुए हैं, और यह अगले साल रिकॉर्ड चीनी उत्पादन का आधार तैयार कर रहा है।”
हालांकि, इस वर्ष चीनी उत्पादन 28 मिलियन टन तक गिरने की संभावना है, जो पिछले साल 31.9 मिलियन टन था। यह आंकड़ा देश की वार्षिक खपत (29.6 मिलियन टन) से भी कम है।
बेहतर लाभ के लिए गन्ने की ओर रुझान
कई किसानों ने सोयाबीन और कपास जैसी वैकल्पिक फसलों से गन्ने की ओर रुख किया है, क्योंकि इन फसलों से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। महाराष्ट्र की नैचुरल शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक बी. बी. ठोंबरे के अनुसार, “पानी की कमी के कारण पिछले साल किसान गन्ना छोड़ अन्य फसलों की ओर गए, लेकिन उन्हें नुकसान झेलना पड़ा। इस साल वे गन्ने को अधिक भरोसेमंद फसल मान रहे हैं।”
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मौसम अनुकूल रहा और कीटों का प्रकोप नहीं हुआ, तो भारत अगले सत्र में 3 से 5 मिलियन टन चीनी का निर्यात कर सकता है। इससे वैश्विक चीनी बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों में स्थिरता आ सकती है।


