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नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में पार्टी के नए मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल केवल भाजपा से ही नहीं बल्कि भारतीय राज्य से भी संघर्ष कर रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि आरएसएस की विचारधारा के साथ कांग्रेस की विचारधारा का संघर्ष कोई नया नहीं है, बल्कि यह हजारों साल पुराना है। उन्होंने इसे एक असमान लड़ाई बताते हुए दावा किया कि इसमें निष्पक्षता की कोई गुंजाइश नहीं है।
राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने कहा, “यदि आप यह सोचते हैं कि हम भाजपा और आरएसएस जैसे केवल राजनीतिक संगठनों से लड़ रहे हैं, तो आप स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं रहे हैं। भाजपा और आरएसएस ने देश की हर प्रमुख संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हम न केवल इन संगठनों से, बल्कि भारतीय राज्य की मौजूदा संरचना से भी लड़ रहे हैं।” उन्होंने भारतीय मीडिया और चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा, “हमारी संस्थाएं अब स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही हैं। मीडिया की भूमिका स्पष्ट रूप से पक्षपाती हो चुकी है, और यहां तक कि आम जनता भी यह समझ चुकी है कि मीडिया अब निष्पक्ष नहीं है।” राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी आयोग की कार्यप्रणाली से असहज है। उन्होंने महाराष्ट्र चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा, “महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच अचानक से एक करोड़ नए मतदाताओं का जुड़ना बेहद समस्याजनक है।” राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से इस पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।
चुनाव आयोग पर सवाल
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखने में विफल रहा है। उन्होंने कहा, “यह चुनाव आयोग का कर्तव्य है कि वह मतदान करने वालों के नाम और पते के साथ स्पष्ट मतदाता सूची उपलब्ध कराए। हालांकि, आयोग ने इस जानकारी को साझा करने से इनकार कर दिया है।” उन्होंने यह भी कहा कि पारदर्शिता लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने विपक्षी दलों से आह्वान किया कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें।
भाजपा और आरएसएस पर आरोप
राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वे अल्पसंख्यकों, पिछड़ी जातियों और आदिवासियों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “भाजपा चाहती है कि भारत को एक व्यक्ति के नियंत्रण में लाया जाए। उनका एजेंडा है कि दलितों, अल्पसंख्यकों, पिछड़ी जातियों और आदिवासियों की आवाज को दबाया जाए।” राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भाजपा और आरएसएस का दृष्टिकोण भारत के तिरंगे और संविधान के प्रति असम्मानपूर्ण है।
कांग्रेस की भूमिका पर जोर
राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “इस देश में कोई अन्य पार्टी नहीं है जो भाजपा और आरएसएस को रोक सके। कांग्रेस पार्टी ही एकमात्र पार्टी है जो इन्हें चुनौती दे सकती है, क्योंकि यह एक विचारधारा वाली पार्टी है। हमारी विचारधारा नई नहीं है।” उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इस संघर्ष में अपनी पूरी शक्ति लगाएं।
प्रतिक्रिया में भाजपा का पलटवार
राहुल गांधी के इन आरोपों पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “राहुल गांधी को अपनी मानसिक स्थिरता की जांच करवानी चाहिए।” उन्होंने कांग्रेस पर राजनीति को भटकाने और जनता का ध्यान भ्रामक मुद्दों की ओर खींचने का आरोप लगाया। भाजपा ने कांग्रेस पर “हिंदू विरोधी” और “भारत विरोधी” एजेंडे का अनुसरण करने का आरोप लगाया।
विहिप और जेडीयू की प्रतिक्रिया
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, “कांग्रेस अपनी गिरती हुई राजनीतिक स्थिति को बचाने के लिए इस तरह के बयान दे रही है। कांग्रेस का एजेंडा अब जनता के सामने उजागर हो चुका है।” जेडीयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, “कांग्रेस का कलंकित अतीत उसे ऐसे सवाल पूछने की इजाजत नहीं देता।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस की हालिया चुनावी हार इस बात का प्रमाण है कि जनता अब उनके आरोपों को गंभीरता से नहीं लेती।
पारदर्शिता और लोकतंत्र की बहाली पर जोर
राहुल गांधी ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की बहाली और पारदर्शिता को बनाए रखना उनकी पार्टी की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का कर्तव्य है कि वह सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
निष्कर्ष
राहुल गांधी के इन बयानों ने भारतीय राजनीति में एक बार फिर से बहस को जन्म दिया है। उन्होंने जहां भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं भाजपा ने इसे राजनीति का हिस्सा बताया है। यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों को एकजुट होने का संदेश दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी ये बातें जनता और विपक्षी दलों पर कितना प्रभाव डालती हैं।
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