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बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित उसूर इलाके में सुरक्षाबलों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने नक्सलियों की बारूदी साजिश को विफल कर दिया। सुरक्षाबलों ने डिमाइनिंग अभियान के दौरान एक 25 किलोग्राम वजनी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बरामद किया। इस आईईडी को समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया, जिससे एक बड़ी तबाही टल गई। अगर यह विस्फोट हो जाता, तो इलाके में भारी नुकसान हो सकता था।
साजिश के पीछे नक्सलियों की मंशा
सुरक्षाबलों के अनुसार, नक्सलियों ने इस आईईडी को बेहद सुनियोजित तरीके से प्लांट किया था। आईईडी को प्लास्टिक के कंटेनर में फिट किया गया था और इसे कमांड स्विच सिस्टम से जोड़ा गया था। इस आईईडी का मुख्य उद्देश्य डिमाइनिंग कार्य में लगे सुरक्षाबलों को निशाना बनाना था। नक्सल ऑपरेशन के लिए जाने वाले जवानों की कंपनी और सीआरपीएफ की टुकड़ी को इस घातक विस्फोटक से निशाना बनाने की योजना थी।
आईईडी को बरामद करने के लिए सुरक्षाबलों ने विशेष सतर्कता बरती। डिमाइनिंग ऑपरेशन के दौरान जवानों ने जब इलाके की जांच की, तो इस संदिग्ध विस्फोटक का पता चला। इसके बाद, जेसीबी मशीन की मदद से इसे बाहर निकाला गया और बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) की टीम ने इसे सुरक्षित रूप से डिफ्यूज कर दिया। सुरक्षाबलों की इस सतर्कता और तेजी से कार्यवाही के कारण संभावित विनाशकारी विस्फोट को रोका जा सका।
नक्सल ऑपरेशन में लगातार सफलताएँ
बीजापुर, बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों का ऑपरेशन लगातार जारी है। पिछले कुछ महीनों में सुरक्षाबलों को कई महत्वपूर्ण सफलताएँ मिली हैं, जिससे नक्सल संगठन बैकफुट पर चला गया है। नक्सली संगठन अब हताशा में बड़ी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।
शनिवार को बीजापुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें आठ नक्सली मारे गए। इसके अलावा, कांकेर और नारायणपुर जिलों में भी नक्सल विरोधी अभियानों में सुरक्षाबलों को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। लगातार दबाव के कारण कई नक्सली सरेंडर कर रहे हैं और आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
बस्तर और बीजापुर में नक्सलियों की बढ़ती बौखलाहट
सुरक्षाबलों की इन सफलताओं से नक्सल संगठनों में बौखलाहट बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि वे बार-बार सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। आईईडी लगाने जैसी घटनाएँ नक्सलियों की हताशा को दर्शाती हैं। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षाबलों ने मिलकर नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को तेज किया है। सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढाँचे के विकास के चलते नक्सलियों की गतिविधियों पर रोक लग रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की घटनाओं को लगातार रोका जाता रहा, तो आने वाले वर्षों में नक्सलवाद की कमर पूरी तरह टूट सकती है।
स्थानीय लोगों की भूमिका और सुरक्षा बलों का समर्थन
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों का समर्थन भी सुरक्षाबलों को मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीणों ने नक्सलियों के खिलाफ आवाज उठाना शुरू कर दिया है। प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे विकास कार्यों और रोजगार के नए अवसरों के कारण युवा अब नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।
बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और अन्य नक्सल प्रभावित जिलों में सरकार द्वारा कई पुनर्वास योजनाएँ चलाई जा रही हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार सुरक्षा, रोजगार और पुनर्वास का आश्वासन दे रही है। इन योजनाओं के चलते बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं और अपने परिवारों के साथ एक सामान्य जीवन बिता रहे हैं।
नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी
राज्य सरकार और केंद्र सरकार, दोनों ही नक्सल उन्मूलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और अन्य सुरक्षाबलों के संयुक्त अभियान से नक्सलियों को लगातार पीछे हटना पड़ रहा है। पिछले कुछ महीनों में कई बड़े नक्सली नेताओं को मार गिराया गया है और बड़ी संख्या में उनके हथियार बरामद किए गए हैं।
हाल ही में सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण, मोबाइल टावर, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया है। इससे स्थानीय लोगों का सरकार और सुरक्षाबलों पर विश्वास बढ़ा है। नक्सलियों की हिंसा और उनकी विचारधारा के खिलाफ अब स्थानीय लोग भी खुलकर विरोध करने लगे हैं।
भविष्य की रणनीति
आने वाले महीनों में सुरक्षाबल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में और अधिक ऑपरेशन चलाने की योजना बना रहे हैं। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त रणनीति से नक्सल गतिविधियों को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य है। इसके लिए आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन सर्विलांस, सैटेलाइट इमेजिंग और खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों की कार्यवाही और अधिक सटीक हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रणनीति जारी रही, तो अगले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में नक्सलवाद पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है।
निष्कर्ष
बीजापुर के उसूर इलाके में सुरक्षाबलों ने जिस तरह से नक्सलियों की इस बड़ी साजिश को नाकाम किया, वह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 25 किलो आईईडी को निष्क्रिय कर सुरक्षाबलों ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों से नक्सली कमजोर हो रहे हैं और उन्हें पीछे हटना पड़ रहा है। सरकार और सुरक्षाबलों की इस रणनीति से आने वाले समय में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक बढ़त मिल सकती है।
स्थानीय लोगों और सरकार के सहयोग से अगर यही प्रयास जारी रहा, तो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की नई राह खुलेगी।
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