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35 साल से थाने पर होमगार्ड की नौकरी करता रहा गैंगस्टर

एडिटर , भारत न्यूज़ लाइव

आज़मगढ़ में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां नकदू नामक एक कुख्यात गैंगस्टर ने फर्जी सर्टिफिकेट और बदले हुए नाम से 35 साल तक थाने पर होमगार्ड की नौकरी की। आरोपी ने खुद को नंदलाल के नाम से पेश किया और वर्षों तक पुलिस महकमे को गुमराह करता रहा।

1984 में पहला हत्या का मामला दर्ज
नकदू के खिलाफ 1984 में हत्या का पहला केस दर्ज हुआ था। इसके बाद उसने लगातार गंभीर अपराधों को अंजाम दिया, जिससे इलाके में उसका खौफ इतना बढ़ गया कि कोई भी उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं कर पाता था। 1988 में उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।

शिकायत के बाद हुआ खुलासा
डीआईजी वैभव कृष्णन के कार्यकाल के दौरान एक स्थानीय निवासी ने नकदू की शिकायत की। जांच के बाद खुलासा हुआ कि नकदू ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए “नंदलाल” के नाम से पुलिस विभाग में नौकरी हासिल की थी।

गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड
नकदू पर लूट, हत्या, हत्या के प्रयास जैसे कई संगीन आरोप दर्ज हैं। खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसे जेल भेज दिया गया है।

नकदू की गिरफ्तारी से इलाके में हड़कंप

नकदू की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। पुलिस विभाग पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने लंबे समय तक आरोपी कैसे बचा रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार, नकदू ने अपनी पहचान छुपाने के लिए होमगार्ड की नौकरी का सहारा लिया और इसी के जरिए वह कानून से बचता रहा।

पुलिस विभाग की लापरवाही उजागर
यह घटना पुलिस विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करने वाला नकदू न केवल अपराधी था बल्कि उसने अपनी स्थिति का गलत फायदा उठाकर अपराधों को अंजाम दिया।

कड़ी कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने पुलिस विभाग से मामले में शामिल सभी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने नकदू को इतने सालों तक बचने का मौका दिया।

पुलिस का बयान
पुलिस विभाग ने कहा है कि नकदू के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और मामले की गहराई से जांच होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो सकें।

न्याय की उम्मीद
नकदू की गिरफ्तारी ने इलाके में राहत की सांस दी है। अब क्षेत्रीय जनता को न्याय की उम्मीद है, और वे चाहते हैं कि नकदू को उसके अपराधों की कड़ी सजा दी जाए।

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