लखनऊ: बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं, नया आदेश लागू
एडिटर , भारत न्यूज़ लाइव
लखनऊ l अब बिना हेलमेट पहने पेट्रोल भरवाना नामुमकिन होगा। जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने बुधवार को नो हेलमेट, नो फ्यूल नियम लागू करने का आदेश जारी किया है। सभी पेट्रोल पंप प्रबंधकों को निर्देश दिया गया है कि बिना हेलमेट पहने किसी भी दोपहिया वाहन चालक को पेट्रोल न दिया जाए।
यह निर्णय मंगलवार को जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में परिवहन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने सड़क हादसों को रोकने के लिए इस कदम पर सहमति जताई।
आदेश के अनुसार, अगर कोई चालक बिना हेलमेट पेट्रोल भरने की ज़िद करता है, तो पंप संचालक इसकी शिकायत पुलिस से करेगा। इस नियम का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिला पूर्ति अधिकारी को सौंपी गई है।
जिलाधिकारी ने बताया कि सड़क हादसों में बड़ी संख्या में लोग अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें से अधिकांश दोपहिया वाहन चालक होते हैं। हेलमेट न पहनने की वजह से यह समस्या और बढ़ जाती है। नो हेलमेट, नो फ्यूल नियम लागू होने से लोगों को हेलमेट पहनने की आदत डालने में मदद मिलेगी, जिससे सड़क दुर्घटनाएं कम होंगी।
सड़क सुरक्षा पर जिला प्रशासन सख्त
जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में परिवहन आयुक्त द्वारा नो हेलमेट, नो फ्यूल योजना पर गहन चर्चा की गई। इस चर्चा के बाद जिलाधिकारी ने इसे तुरंत प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया।
बैठक में शामिल अधिकारियों ने बताया कि यह नियम न सिर्फ हेलमेट पहनने की आदत को बढ़ावा देगा, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा। बैठक में जिला पूर्ति अधिकारी, परिवहन विभाग के अधिकारी, और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
निगरानी की जाएगी सख्ती से
जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार, पेट्रोल पंपों पर इस नियम के पालन की निगरानी जिला पूर्ति अधिकारी करेंगे। साथ ही, पेट्रोल पंप प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यदि कोई व्यक्ति नियम का उल्लंघन करने की कोशिश करता है या दबाव बनाता है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
हेलमेट की अहमियत पर जोर
जिला प्रशासन का मानना है कि हेलमेट पहनने से सड़क हादसों में होने वाली मौतों में कमी आएगी। अक्सर देखा गया है कि दुर्घटनाओं में शामिल अधिकांश दोपहिया वाहन चालक हेलमेट नहीं पहने होते हैं। यह नियम लोगों को सुरक्षित यात्रा के लिए प्रेरित करेगा और सड़क पर अनुशासन बढ़ाएगा।
इस सख्त कदम से उम्मीद है कि राजधानी में सड़क हादसों में कमी आएगी और लोग यातायात नियमों का पालन करने के प्रति अधिक जिम्मेदार बनेंगे।
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