मेरठ: जाति बंधन और पारिवारिक विरोध ने ली प्रेमी जोड़े की जान

भारत न्यूज़ लाइव
मेरठ के खरखौदा थाना क्षेत्र में बुधवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां प्रेमी जोड़े शिवांक त्यागी (24) और सोनाली (23) ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जान दे दी। यह घटना उस वक्त हुई जब युवती के घर उसकी हल्दी की रस्म होनी थी और दो दिन बाद उसकी शादी तय थी। युवक का भी दूसरी जगह रिश्ता पक्का हो चुका था।
प्रेम कहानी का आरंभ
शिवांक त्यागी अतराड़ा गांव का निवासी था और अपने चाचा, भाजपा नेता उमेश त्यागी के साथ हार्डवेयर की दुकान चलाता था। सोनाली बावनपुरा की रहने वाली थी और एनसीआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में क्लर्क के पद पर कार्यरत थी। सोनाली के पिता भी उसी संस्थान में नौकरी करते थे। तीन साल पहले दोनों के बीच प्रेम संबंध शुरू हुए।

परिजनों का विरोध और अलगाव की कोशिशें
सोनाली के परिजनों को जब इस प्रेम संबंध की जानकारी हुई, तो उन्होंने इसका विरोध किया। उन्होंने सोनाली की शादी खरखौदा निवासी एक पुलिसकर्मी से तय कर दी। मंगलवार को सोनाली के परिजन सगाई की रस्म के लिए गए थे। इसके बाद बुधवार सुबह हल्दी की तैयारी चल रही थी। दूसरी ओर, शिवांक के परिजनों ने इस रिश्ते का ज्यादा विरोध नहीं किया था, लेकिन समाज और जाति के बंधनों के कारण दोनों परिवार शादी के लिए राजी नहीं हुए।
अंतिम मुलाकात और आत्मघाती कदम
बुधवार सुबह सोनाली ने अपने घरवालों से कहा कि वह शादी की खरीदारी के लिए बाजार जा रही है। हालांकि, परिजनों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी। दूसरी तरफ, शिवांक अपनी कार लेकर गांव के बाहर सोनाली का इंतजार कर रहा था।

दोनों ने पहले से ही यह निर्णय कर लिया था कि अगर साथ जी नहीं सकते तो साथ मर जरूर सकते हैं। शिवांक जहरीला पदार्थ लेकर आया था। दोनों ने कार में बैठकर करीब दो घंटे तक बातचीत की और फिर वह घातक कदम उठाया।
अंतिम कॉल और सुसाइड नोट
जहर खाने के बाद शिवांक ने अपने चाचा को फोन किया और कहा, “चाचा, हमने जहर खा लिया है। अब नहीं बचेंगे। इसे मेरी आखिरी कॉल समझना।” यह सुनकर परिजन तुरंत उन्हें ढूंढने के लिए निकले। बिजली बंबा चौकी क्षेत्र में काजीपुर गांव के पास कार में दोनों बेहोशी की हालत में तड़पते हुए मिले।
परिजन दोनों को अस्पताल ले गए, लेकिन उपचार के दौरान शाम को पहले शिवांक और फिर सोनाली ने दम तोड़ दिया। कार से पुलिस को एक हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया।

परिजनों का दुख
सोनाली अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। उसकी शादी के लिए परिजनों ने बड़े मन से तैयारी की थी। रिश्तेदारों का आना शुरू हो चुका था। हल्दी की रस्म के लिए घर में खुशी का माहौल था। लेकिन साढ़े 11 बजे जब परिजनों को इस मनहूस खबर की जानकारी मिली, तो शादी की सारी खुशियां गम में बदल गईं। परिजन तुरंत अस्पताल पहुंचे, जहां दोनों की मौत हो गई।
समाज और जाति बंधन की त्रासदी
ग्रामीणों के अनुसार, शिवांक का सोनाली के घर आना-जाना काफी दिनों से था। दोनों घंटों फोन पर बात करते थे और चोरी-छिपे मिलते थे। जब यह बात परिजनों को पता चली, तो उन्होंने उन्हें मिलने से रोकने की कोशिश की। हालांकि, दोनों ने शादी के लिए परिजनों को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन समाज और जाति के बंधनों के चलते वे सफल नहीं हो सके। आखिरकार, परिवारवालों ने दोनों की शादी कहीं और तय कर दी।
अंतिम संस्कार और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि किसी भी पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है। दोनों के शवों का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस को घटना स्थल से जो सुसाइड नोट मिला, उसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया है।
निष्कर्ष
यह घटना समाज में व्याप्त जाति बंधन और पारिवारिक विरोध के कारण होने वाली त्रासदियों की ओर इशारा करती है। शिवांक और सोनाली की प्रेम कहानी का अंत दुखद रहा, जो यह सवाल उठाता है कि क्या समाज को प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों को स्वीकारने के लिए अपने विचारों को बदलने की आवश्यकता है।
Read Also : बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर घर में हमला, मुंबई के अस्पताल में भर्ती, हालत स्थिर



