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भारत सरकार की निरंतर कूटनीतिक सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए गए प्रयासों के चलते 2014 से अब तक 10,000 से अधिक भारतीय नागरिकों की विदेशी जेलों से रिहाई संभव हो सकी है। विभिन्न देशों में आरोपों का सामना कर रहे भारतीयों को कानूनी और राजनयिक सहायता प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने विशेष रणनीतियां अपनाई हैं, जिनमें उच्च स्तरीय वार्ताएं और कूटनीतिक हस्तक्षेप शामिल हैं। विशेष रूप से, खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को रिहा कराया गया है, जिससे भारत और इन देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रमाण मिलता है।
रमज़ान के दौरान यूएई से 500 भारतीयों की रिहाई
हाल ही में, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने रमज़ान के इस्लामी पवित्र महीने के दौरान 500 भारतीय कैदियों को क्षमादान देकर रिहा किया। यह निर्णय भारत और यूएई के बीच घनिष्ठ संबंधों को दर्शाता है और यह दिखाता है कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर कितनी प्रतिबद्ध है। 2014 से अब तक, भारत सरकार की कूटनीतिक पहलों के कारण अकेले यूएई से 2,783 भारतीय नागरिकों को रिहा कराया गया है।
सऊदी अरब से 850 भारतीयों की रिहाई
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 2019 में भारत यात्रा के दौरान 850 भारतीय कैदियों की रिहाई का आदेश दिया था। यह भारत की सफल कूटनीतिक वार्ता का परिणाम था, जिसने भारतीय नागरिकों को कानूनी सहायता और न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कतर से नौसेना के आठ पूर्व अधिकारियों की रिहाई
2023 में भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों के कारण कतर में मौत की सजा पाए नौसेना के आठ पूर्व अधिकारियों की सजा कम कर दी गई और फिर उनमें से अधिकांश को रिहा कर दिया गया। यह मामला भारत सरकार के लिए विशेष रूप से संवेदनशील था, क्योंकि यह अधिकारी भारतीय नौसेना के पूर्व सदस्य थे। भारतीय राजनयिकों ने इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कतर सरकार से गहन वार्ता की और अंततः उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की।
ईरान, बहरीन और कुवैत से भारतीय नागरिकों की रिहाई
ईरान सरकार ने 2023 में 12 भारतीय मछुआरों सहित 43 भारतीयों को रिहा किया था, जबकि 2024 में 77 भारतीयों को रिहा किया गया। वहीं, बहरीन सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की 2019 की यात्रा के दौरान 250 भारतीय कैदियों को क्षमादान दिया था। कुवैत के अमीर ने 2017 में कूटनीतिक वार्ता के बाद 22 भारतीयों को रिहा किया और 97 अन्य की सजा कम की। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि भारत सरकार विभिन्न देशों के साथ मजबूत राजनयिक संबंधों को बनाए रखते हुए अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करने के लिए सतत प्रयासरत है।
पाकिस्तान और श्रीलंका से भारतीय मछुआरों की रिहाई
भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद, कूटनीतिक हस्तक्षेपों के माध्यम से 2014 से अब तक पाकिस्तान से 2,639 भारतीय मछुआरों और 71 नागरिक कैदियों की रिहाई सुनिश्चित की गई है। इसी तरह, भारत के निरंतर प्रयासों के चलते श्रीलंका ने 2014 से अब तक 3,697 भारतीय मछुआरों को रिहा किया है।
भारत सरकार की विदेश नीति और मानवीय कूटनीति
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि भारत सरकार न केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है, बल्कि विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और रिहाई को भी प्राथमिकता दे रही है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो यह दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति को अधिक प्रभावी ढंग से दर्ज कर रहा है।
मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत की कूटनीति न केवल व्यापार और सामरिक संबंधों तक सीमित रही है, बल्कि यह मानवीय मुद्दों पर भी केंद्रित रही है। विभिन्न देशों से भारतीय नागरिकों की रिहाई की ये घटनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को और अधिक सशक्त बना रहा है।
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