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फ़िल्म निर्देशक अनिल शर्मा की नई फिल्म ‘वनवास’ माता-पिता की उपेक्षा और उनके प्रति बच्चों की बदलती सोच को उजागर करती है। यह फ़िल्म उस समाजिक समस्या पर प्रकाश डालती है, जहां बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता को वृद्धाश्रम या अनजान जगह पर छोड़ आते हैं।
कहानी का सार
फ़िल्म की कहानी एक बुजुर्ग दंपत्ति पर आधारित है, जिन्हें उनका बेटा और बहू संपत्ति के लालच और बीमारी के कारण बनारस में छोड़कर चले जाते हैं। उन्हें यह भी याद नहीं रहता कि उनके माता-पिता ने उनकी परवरिश के लिए कितनी कुर्बानियां दी थीं। यह कहानी भावनात्मक रूप से दर्शकों को झकझोर देती है और परिवार के महत्व को रेखांकित करती है।
समाज के लिए संदेश
‘वनवास’ उन बच्चों को एक सशक्त संदेश देती है जो अपने माता-पिता की उपेक्षा करते हैं। फ़िल्म याद दिलाती है कि माता-पिता की सेवा और सम्मान हमारा नैतिक कर्तव्य है। यह संदेश आज के समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है।
पुरानी फिल्मों की झलक
फ़िल्म का विषय उन प्रसिद्ध फिल्मों की याद दिलाता है, जैसे ‘अवतार’ और ‘बाग़बान’, जिन्होंने बुजुर्गों के साथ समाज के व्यवहार को दिखाया था।
निष्कर्ष
अनिल शर्मा की ‘वनवास’ एक विचारशील फिल्म है जो भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर दिलों को छूने में सफल होती है। इस तरह की फिल्मों पर चर्चा और जागरूकता बेहद जरूरी है।



