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हल्द्वानी: उत्तराखंड की धामी सरकार राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के बेहद करीब है। हाल ही में, UCC की नियमावली का ड्राफ्ट तैयार हो गया है और इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपा गया। इस ड्राफ्ट को पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने तैयार किया है। इसके साथ ही, UCC से जुड़ा एक मोबाइल ऐप और पोर्टल भी बनकर तैयार हो चुका है, जिससे इसके लागू होने की प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जो UCC को लागू करेगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और आपत्तियां
इस कदम पर विपक्ष ने धामी सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता यशपाल आर्य ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि UCC को लागू करने का राजनीतिक उद्देश्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून में सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान होना चाहिए और किसी के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
वहीं, कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने भी UCC में कई विसंगतियों की ओर इशारा किया है। उन्होंने कहा कि इस कानून में लिव-इन रिलेशनशिप को मान्यता देने और रजिस्ट्रेशन की बात कही गई है, जो उत्तराखंड की संस्कृति के अनुरूप नहीं है। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकार UCC के साथ-साथ सशक्त भू कानून की भी बात कर रही है, लेकिन इससे प्रदेश की जमीनें निजी हाथों में जा सकती हैं।
यूसीसी से क्या बदलेगा?
UCC लागू होने के बाद, राज्य में एक समान कानून सभी नागरिकों पर लागू होगा, चाहे उनकी धार्मिक पहचान कुछ भी हो। यह कदम उत्तराखंड को सामाजिक और कानूनी रूप से एक नए मोड़ पर ले जा सकता है, लेकिन इसके साथ उठ रहे सवाल और चिंताएं इसे एक विवादास्पद मुद्दा बना रहे हैं।
आगे का रास्ता
हालांकि, सरकार के इस कदम का उद्देश्य न्याय और समानता को बढ़ावा देना है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीति से प्रेरित मान रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसे लागू करने के बाद राज्य पर इसके क्या प्रभाव होते हैं और क्या इससे जुड़े विवादों को सरकार सफलतापूर्वक हल कर पाती है


