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उत्तरकाशी के मरीजों के लिए खुशखबरी: जल्द शुरू होगा प्लेटलेट्स बैंक और ब्लड सेपरेशन यूनिट

उत्तरकाशी को मिलेगी नई स्वास्थ्य सुविधा, जिला अस्पताल में बनेगा प्लेटलेट्स बैंक

भारत न्यूज़ लाइव

उत्तरकाशी: उत्तरकाशी जिले को जल्द ही एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिलने जा रही है, जो मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत की बड़ी खबर है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो जिला अस्पताल में जल्द ही प्लेटलेट्स बैंक की स्थापना की जाएगी। फिलहाल अस्पताल में ब्लड बैंक तो है, लेकिन प्लेटलेट्स बैंक न होने की वजह से ब्लड के महत्वपूर्ण घटकों जैसे प्लेटलेट्स और प्लाज्मा को अलग करना संभव नहीं है। इसके अभाव में कई गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्लेटलेट्स की तत्काल आवश्यकता होने पर देहरादून या ऋषिकेश जैसे बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पताल प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्लेटलेट्स बैंक के साथ ही ब्लड सेपरेशन यूनिट स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए 10.76 लाख रुपये की डीपीआर तैयार कर ली गई है, और भवन निर्माण के लिए 50 वर्ग मीटर जगह चिन्हित की गई है, जो ब्लड बैंक के पीछे स्थित होगी। जैसे ही बजट जारी होता है, इस परियोजना का काम तुरंत शुरू हो जाएगा। यह कदम उत्तरकाशी जिले के स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करेगा, जिससे स्थानीय लोगों को अब बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम अधिकारी हरदेव राणा के अनुसार, यह प्लेटलेट्स बैंक न केवल गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एक जीवनदायिनी साबित होगा, बल्कि ब्लड से जुड़े कई अन्य रोगों के इलाज में भी मददगार रहेगा।

प्लेटलेट्स बैंक और ब्लड सेपरेशन यूनिट की स्थापना से मरीजों को बड़े स्तर पर लाभ मिलेगा, जिससे उन्हें उपचार के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी।
डॉ. प्रेम पोखरियाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल उत्तरकाशी

प्लेटलेट्स मानव शरीर में रक्तस्राव को रोकने का काम करती हैं, खासकर जब चोट लगने पर खून बहने का खतरा हो। शरीर के रक्त में चार मुख्य घटक होते हैं: श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBC), लाल रक्त कोशिकाएं (RBC), प्लाज्मा, और प्लेटलेट्स। जब किसी व्यक्ति के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या 50,000 से कम हो जाती है, तो शरीर को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
मनोज नौटियाल, वरिष्ठ टेक्नीशियन, ब्लड बैंक

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