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रुड़की: भारतीय किसान यूनियन तोमर गुट के किसान एआरटीओ कार्यालय के बाहर अपनी मांगों के समर्थन में सड़कों पर उतरे। बड़ी संख्या में किसानों ने अब्दूल कलाम चौक पर इकट्ठा होकर प्रदर्शन शुरू किया। किसानों की प्रमुख मांगें थीं—एआरटीओ कार्यालय के कर्मचारियों की संपत्तियों की जांच, उनके निलंबन, और किसानों के खिलाफ चल रहे मुकदमों को वापस लेना।
पुलिस से सामना: जैसे ही किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ एआरटीओ कार्यालय की ओर बढ़े, पुलिस ने एसडीएम चौक पर उन्हें रोकने का प्रयास किया। दोनों पक्षों के बीच हुई नोकझोंक के बाद किसान तहसील परिसर में जाकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
पिछले विवाद की छाया: किसानों ने बताया कि 6 अगस्त को एआरटीओ कार्यालय पर पहले भी धरना प्रदर्शन हुआ था, जिसमें उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ और कई किसानों पर झूठे मुकदमे भी दर्ज किए गए। इस बार उनकी मांग थी कि न केवल एआरटीओ अधिकारियों को निलंबित किया जाए, बल्कि उनके खिलाफ दायर किए गए मुकदमे भी वापस लिए जाएं।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की मध्यस्थता: किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए रुड़की के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे और अधिकारियों ने किसानों को उनके मुद्दों के समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद, किसानों ने धरना समाप्त करने का निर्णय लिया। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर ने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे एआरटीओ कार्यालय के बाहर झोपड़ी डालकर अनिश्चितकालीन धरना देंगे और सरकार का भी घेराव करेंगे।
किसानों के इस आंदोलन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे अपनी अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी बाधाओं का सामना करना पड़े।


