
एडिटर , भारत न्यूज़ लाइव
रूड़की l कलियर निवासी 13 वर्षीय उवेश तीन दिन पहले बकरी चराने के लिए गया था जिसका शव जंगल में एक गन्ने के खेत में मिला। यह घटना तब हुई जब उवेश 24 अक्टूबर को घर से बाहर निकला था। उसके लापता होने की जानकारी मिलते ही परिजन और पुलिस उसकी तलाश में जुट गए थे। उवेश की परिजनों ने पुलिस को दी गई तहरीर में कुछ रिश्तेदारों पर शक जताते हुए अपहरण का आरोप लगाया था। इस तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिश्तेदारों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया था।
26 अक्टूबर को एक किसान जब अपने खेत पर गया, तो उसे उवेश का शव पड़ा हुआ मिला। इस घटना की सूचना तुरंत पुलिस और परिजनों को दी गई। शव मिलने की खबर सुनकर मौके पर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। पुलिस की टीम, जिसमें एसपी देहात स्वप्न किशोर सिंह और एसओ दिलवर सिंह नेगी शामिल थे, घटनास्थल पर पहुंची और जानकारी जुटाई। फोरेंसिक टीम ने भी मौके पर पहुंचकर शव की जांच की।
उवेश के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए, कहकर कि यदि पुलिस उनकी मदद करती तो उनके बच्चे की जान बच सकती थी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे बच्चे की हत्या की आशंका और बढ़ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसओ दिलवर सिंह नेगी ने कहा कि घटना की जांच चल रही है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने इलाके में एक गहरी चिंता पैदा कर दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पुलिस ने समय पर कार्रवाई की होती, तो क्या यह घटना रोकी जा सकती थी। परिजनों का रोष स्पष्ट है, और वे न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें न्याय तब तक नहीं मिलेगा जब तक कि आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।
इस बीच, स्थानीय समुदाय में भी इस घटना को लेकर चर्चा हो रही है। कई लोग यह पूछ रहे हैं कि बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। यह मामला न केवल एक परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी के रूप में सामने आया है। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करती है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
उवेश के शव मिलने से जहां एक तरफ परिवार में मातम छा गया है, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना है कि क्या इस मामले में सही तरीके से जांच की जाती है और दोषियों को सजा मिलती है। न्याय की यह लड़ाई न केवल उवेश के परिवार की है, बल्कि समाज के हर उस सदस्य की है जो बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए चिंतित है।


