
एडिटर , भारत न्यूज़ लाइव
देहरादून: उत्तराखंड में निकाय चुनाव नजदीक आ रहे हैं और चुनाव से पहले निकायों में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को लेकर शासन ने कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। शासन अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उन कर्मचारियों को चिन्हित किया जाए, जो बिना स्वीकृत पदों के भर्ती किए गए हैं। इसके लिए विभाग ने सभी निकायों से रिपोर्ट भी मांगी है।
निकाय चुनाव से पहले पदों के बिना भर्ती की जांच
उत्तराखंड में आगामी निकाय चुनाव की घोषणा हो सकती है, और नए निकाय बोर्ड के गठन से पहले शासन उन आउटसोर्स कर्मचारियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो बिना स्वीकृत पदों के भर्ती किए गए हैं। शहरी विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदेशभर के निकायों में करीब 8,000 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों में से लगभग 700 ऐसे हैं, जिनके लिए पद स्वीकृत नहीं थे।
राजनीतिक हस्तक्षेप से भर्ती की समस्या
उत्तराखंड में नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगमों में अक्सर राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण पदों के बिना नियुक्तियां दी जाती हैं। इस प्रकार की नियुक्तियां नियमित नहीं होतीं, और शासन अब इस पर सख्ती से कार्यवाही करने का मन बना चुका है।
शासन की कार्रवाई
शासन ने शहरी विकास विभाग के माध्यम से सभी निकायों से उन कर्मचारियों की रिपोर्ट मांगी है, जिनके सापेक्ष कोई स्वीकृत पद नहीं हैं। इसके बाद विभाग उन कर्मचारियों को उनके पदों से हटा देगा। शहरी विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई जल्द ही शुरू की जाएगी।
एडिशनल डायरेक्टर का बयान
एडिशनल डायरेक्टर शहरी विकास विभाग, डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने बताया कि विभाग ने 12 जून 2015 को पुनर्गठित ढांचे में स्वीकृत पदों के अलावा यदि कोई नियुक्तियां दी गई हैं, तो उन नियुक्तियों की जानकारी सभी निकायों से मांगी गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर इन कर्मचारियों को नियमित वेतन दिया गया है, तो वेतन की वसूली संबंधित निकाय से की जाएगी।
स्पष्टीकरण मांगा गया
डॉ. मिश्रा ने यह भी बताया कि शासन द्वारा निकायों को एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होगा कि किन निकायों में राजनीतिक दबाव या अन्य कारणों से बिना स्वीकृत पदों के कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।
निष्कर्ष
राजनीतिक दबाव के कारण कई बार निकायों में अनौपचारिक तरीके से कर्मचारियों की भर्ती हो जाती है, जिससे शासन को भविष्य में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अब शासन ने इस पर सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


