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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर भारत सरकार कूटनीतिक प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश सरकार से हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक माध्यमों का उपयोग शुरू कर दिया है।”
बांग्लादेश सरकार पर जिम्मेदारी
सरमा ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय, जो वहां का सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक है, की सुरक्षा की जिम्मेदारी बांग्लादेश सरकार की है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, “बांग्लादेश में जो घटनाएं हो रही हैं, वे दुर्भाग्यपूर्ण हैं। भारत सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया दी है और हम उम्मीद करते हैं कि वहां की सरकार अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करेगी।”
भारतीयों की प्रार्थनाएं बांग्लादेशी हिंदुओं के साथ
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के लोग बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा, “हम सभी उनकी असुरक्षा, उत्पीड़न और गिरफ़्तारी की खबरों से चिंतित हैं। लेकिन हमें विश्वास है कि मोदी जी के प्रयासों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।”
सीमा पर कड़ी निगरानी
सरमा ने कहा कि असम और बांग्लादेश की सीमा पर सुरक्षा बलों द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश से भारत में घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया जा रहा है।
अवैध घुसपैठ पर सख्त रुख
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में घुसपैठ की कोशिश करने वालों में हिंदू नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हमने देखा है कि घुसपैठ करने वाले कौन हैं। जब वे पकड़े जाते हैं और वापस भेजे जाते हैं, तो मैं उनके नाम, फोटो और अन्य विवरण सोशल मीडिया पर साझा करता हूं।”
160 से अधिक घुसपैठिए पकड़े गए
सरमा ने बताया कि अगस्त से अब तक 160 से अधिक घुसपैठियों को सुरक्षा बलों ने पकड़ा और वापस भेजा है। इनमें से अधिकतर लोग मुस्लिम समुदाय के थे। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार इन घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है।”
यह बयान न केवल बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंता को दर्शाता है, बल्कि सीमा पर घुसपैठ को रोकने के लिए असम सरकार की सख्त नीति का भी संकेत देता है।


