
भारत न्यूज़ लीवर
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स और असामाजिक गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1986 को “ड्रैकोनियन” (कठोर) करार दिया है। यह टिप्पणी जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्वनाथन की पीठ ने की, जब उन्होंने एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई की, जिसने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।
क्या है मामला?
- याचिकाकर्ता पर गंगा नदी में अवैध खनन के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
- याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि एक ही आरोप को लेकर दो बार मामला दर्ज किया गया है।
- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने इस अधिनियम के तहत लंबित कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां
- “यह अधिनियम अत्यधिक कठोर प्रतीत होता है,” सुप्रीम कोर्ट ने कहा।
- अदालत ने कहा कि इस पर विचार किया जाएगा और याचिका को स्वीकार कर लिया।
- नवंबर 2022 में अदालत ने अंतरिम आदेश में कहा था कि “याचिकाकर्ता के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।”
गैंगस्टर एक्ट पर सवाल
- राज्य सरकार के वकील ने अधिनियम के प्रावधानों का समर्थन किया।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले को गहराई से देखने की जरूरत है।
- अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका भी शीर्ष अदालत में लंबित है।
याचिकाकर्ता के तर्क
- हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वह इस मामले में झूठा फंसाया गया है।
- उन्होंने तर्क दिया कि गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला केवल एक अन्य केस के आधार पर दर्ज किया गया है, जिसमें उनका नाम नहीं था।
क्या होगा आगे?
- सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है।
- गैंगस्टर एक्ट के कठोर प्रावधानों की समीक्षा की जाएगी।
- इस मामले की अगली सुनवाई में अधिनियम की संवैधानिकता पर विस्तृत बहस होने की उम्मीद है।
गैंगस्टर एक्ट पर बढ़ती बहस
उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट का उपयोग अपराधियों पर लगाम कसने के लिए किया जाता है, लेकिन इसके कठोर प्रावधानों के कारण इसे लेकर अक्सर विवाद खड़ा होता है। अब सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा के बाद इस कानून में बदलाव की संभावनाएं प्रबल हो सकती हैं।


