
नई दिल्ली: पीएम इंटर्नशिप योजना के पायलट प्रोजेक्ट में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों द्वारा ऑफर मिलने के बाद इसे ठुकराने का मामला सामने आया है। शुरुआती हफ्तों में यह दर केवल एक-तिहाई थी, हालांकि अब इसमें सुधार हुआ है।
ऑफर ठुकराने के पीछे कारण
- कई उम्मीदवारों ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने योजना के लिए माता-पिता के दबाव में आवेदन किया था।
- गंभीरता की कमी और अंतिम क्षण में ऑफर को अस्वीकार करने जैसी स्थितियां सामने आईं।
स्वीकृति दर में सुधार
- नवंबर में शुरू हुई ऑफर प्रक्रिया के पहले सप्ताह में स्वीकृति दर केवल 33% थी।
- समय के साथ यह बढ़कर दो-तिहाई हो गई और अब और सुधार हो रहा है।
पायलट प्रोजेक्ट के मुख्य आंकड़े
- 1,25,000 इंटर्न का लक्ष्य रखा गया था।
- 6,20,000 से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया।
- यह दिखाता है कि इच्छुक उम्मीदवारों की कमी नहीं है, लेकिन कई गैर-गंभीर आवेदन भी हुए।
भविष्य के लिए सबक और तैयारी
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट से एक महत्वपूर्ण सबक है। गैर-गंभीर आवेदनों से निपटने और इस तरह की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए योजना के विस्तार पर काम किया जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट में प्रमुख कंपनियां
- रिलायंस इंडस्ट्रीज
- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
- एचडीएफसी बैंक
- मारुति सुजुकी
- लार्सन एंड टूब्रो
- महिंद्रा एंड महिंद्रा
- बजाज फाइनेंस
- जुबिलेंट फूडवर्क्स
योजना की व्यापक दृष्टि
इस योजना की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई बजट में की थी। इसका उद्देश्य अगले पांच वर्षों में 500 शीर्ष कंपनियों के माध्यम से 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप का अवसर प्रदान करना है, ताकि युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाई जा सके।
आधिकारिक लॉन्च की प्रतीक्षा
योजना के तहत पहला बैच सोमवार को अपनी इंटर्नशिप शुरू कर चुका है। हालांकि, योजना का औपचारिक लॉन्च दिसंबर के अंत तक होने की संभावना है।


