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देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग में वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों के प्रमोशन को लेकर शासन ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। हालांकि, अधिकारियों के प्रमोशन से जुड़ी विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक पहले ही संपन्न हो चुकी थी, लेकिन आधिकारिक आदेश की प्रतीक्षा बनी हुई थी। अब शासन की ओर से आदेश जारी होने के बाद वन विभाग में जिम्मेदारियों के नए समीकरण उभर कर सामने आ रहे हैं।
उत्तराखंड शासन के प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु के कार्यालय से जारी आदेश के तहत कई वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों को पदोन्नति दी गई है। जिन अधिकारियों को प्रमोशन मिला है, उनमें एपीसीसीएफ (Additional Principal Chief Conservator of Forest) कपिल लाल, नीना ग्रेवाल और एसपी सुबुद्धि के नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा सीसीएफ (Chief Conservator of Forest) मीनाक्षी जोशी को भी पदोन्नति दी गई है।
प्रमोशन के बाद कपिल लाल को पीसीसीएफ (Principal Chief Conservator of Forest) रैंक पर पदोन्नत किया गया है। इसी तरह, नीना ग्रेवाल और एसपी सुबुद्धि भी पीसीसीएफ बन गए हैं। हालांकि, नीना ग्रेवाल और एसपी सुबुद्धि प्रतिनियुक्ति (deputation) पर होने के कारण इन्हें प्रोफार्मा पदोन्नति (proforma promotion) दी गई है। इनके सेवा वर्ष आवंटन की बात करें तो कपिल लाल और नीना ग्रेवाल को 1993 जबकि एसपी सुबुद्धि को 1994 आवंटित वर्ष मिला है।
उपवन संरक्षक (Deputy Conservator of Forests) चंद्रशेखर जोशी और कल्याणी को भी पदोन्नति दी गई है। इन दोनों अधिकारियों को प्रमोशन मिलने के बाद उनके वेतनमान में वृद्धि का लाभ मिलेगा। वहीं, अब तक सीसीएफ एचआरडी (Human Resource Development) की जिम्मेदारी संभाल रही मीनाक्षी जोशी को अब एपीसीसीएफ के पद पर पदोन्नति दी गई है। उन्हें 1 जनवरी 2025 से पदोन्नति का लाभ मिलेगा।
उत्तराखंड वन विभाग में इन तीन अधिकारियों के पीसीसीएफ स्तर पर पदोन्नत होने के बाद विभाग में इस स्तर के अधिकारियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। हालांकि, इनमें से तीन अधिकारी वर्तमान में वन मुख्यालय के बाहर अलग-अलग दायित्वों को संभाल रहे हैं। दूसरी ओर, इसी वर्ष चार पीसीसीएफ स्तर के अधिकारी सेवानिवृत्त भी होने वाले हैं।
राज्य में कई वरिष्ठ अधिकारियों के इस वर्ष सेवानिवृत्त होने और कुछ अधिकारियों के प्रमोशन के कारण विभागीय समीकरणों में बदलाव होने जा रहा है। आगामी महीनों में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों और जिम्मेदारियों में फेरबदल होगा। इस वर्ष उत्तराखंड को एक नया प्रमुख वन संरक्षक (Head of Forest Force – HoFF) मिलने जा रहा है। इसके अलावा, प्रशासन, वन विकास निगम में प्रबंध निदेशक और अन्य प्रमुख पदों पर भी सेवानिवृत्ति के कारण बदलाव होना निश्चित है।
वरिष्ठ अधिकारियों के प्रमोशन और सेवानिवृत्ति से विभाग की कार्यप्रणाली पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा। अनुभवी अधिकारियों की सेवानिवृत्ति से जहां नए अधिकारियों को नेतृत्व करने का अवसर मिलेगा, वहीं कुछ महत्वपूर्ण पदों पर नए नामों की नियुक्ति से नीतियों के क्रियान्वयन में भी परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
उत्तराखंड सरकार वन विभाग में कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है। हाल ही में कई नई परियोजनाओं और संरक्षण योजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनका क्रियान्वयन प्रमोशन प्राप्त अधिकारियों की नई टीम के नेतृत्व में होगा। वन क्षेत्र के विकास, वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और वनीकरण से जुड़ी पहलों को गति देने के लिए विभागीय अधिकारियों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी जाएंगी।
वन विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति के साथ ही विभागीय जिम्मेदारियों में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। आगामी समय में नए पीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों की नियुक्तियों और सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों के स्थान पर नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तराखंड वन विभाग आने वाले समय में किस तरह से नई कार्यशैली और योजनाओं को अपनाता है और प्रदेश के वन संरक्षण और संवर्धन की दिशा में आगे बढ़ता है।
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