देहरादून: उत्तरकाशी जिले में पिछले एक महीने में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। हाल ही में दिल्ली में भी भूकंप आया, जिसने फिर से भूकंप को लेकर चर्चा तेज कर दी है। उत्तराखंड भूकंपीय रूप से संवेदनशील जोन 4 और 5 में आता है, जबकि दिल्ली जोन 4 में स्थित है, जिससे इन क्षेत्रों में भूकंप की संभावना बनी रहती है।
हाल ही में उत्तरकाशी और दिल्ली में आए भूकंप की एक खास विशेषता उनकी गहराई (डेप्थ) रही, जो मात्र 5 किलोमीटर थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, भूकंप की तीव्रता (मैग्नीट्यूड) जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही उसकी गहराई भी मायने रखती है।

भूकंप की गहराई और उसका प्रभाव
भूकंप का उद्गम केंद्र यानी जहाँ से ऊर्जा रिलीज होती है, उसकी गहराई के अनुसार भूकंप को तीन भागों में बाँटा गया है:
- उथला भूकंप (Shallow Earthquake) – 0 से 70 किमी गहराई तक।
- मध्यवर्ती भूकंप (Intermediate Earthquake) – 70 से 300 किमी तक।
- गहरा भूकंप (Deep Earthquake) – 300 से 720 किमी तक।
वैज्ञानिकों के अनुसार, 5 से 10 किमी गहराई वाले भूकंप सबसे ज्यादा नुकसानदायक होते हैं। उत्तराखंड समेत पूरा हिमालयी क्षेत्र भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। हिमालय क्षेत्र में भूकंप की औसत गहराई 20 से 25 किमी होती है, लेकिन उत्तरकाशी में आए हालिया भूकंप मात्र 5 किमी गहराई के थे, जिससे लोगों को झटके अधिक तीव्र महसूस हुए।
दिल्ली और उत्तरकाशी में हाल के भूकंप
- दिल्ली (17 फरवरी 2025) – 4.0 मैग्नीट्यूड, 5 किमी गहराई।
- उत्तरकाशी (पिछले एक महीने में 9 भूकंप) – 3.5 से कम मैग्नीट्यूड, 5 किमी गहराई।
- रुद्रप्रयाग (13 फरवरी 2025) – 10 किमी गहराई।
- बागेश्वर – 5 किमी गहराई।
दिल्ली में भूकंप की सामान्य गहराई 5 से 10 किमी होती है। 1960 में दिल्ली में 5.6 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया था, जिससे कई इमारतों को नुकसान हुआ था।
वैज्ञानिकों की राय
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि भूकंप की गहराई जितनी कम होगी, उसका असर उतना ही ज्यादा होगा। हिमालयी क्षेत्रों में आने वाले भूकंप की गहराई आमतौर पर 20 से 25 किमी होती है, लेकिन हाल के 5 किमी गहराई वाले भूकंप चिंता का विषय हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में अधिक तीव्रता वाले उथले भूकंप बड़े नुकसान का कारण बन सकते हैं।
Read Also : नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़: 18 लोगों की मौत, व्यवस्था पर उठे सवाल



