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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात कुंभ मेले में स्नान के लिए जा रहे यात्रियों के बीच भगदड़ मचने से 18 लोगों की जान चली गई, जबकि कई घायल हो गए। इस घटना ने रेलवे प्रशासन की तैयारियों और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- अत्यधिक भीड़: कुंभ मेले के चलते यात्रियों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई। शनिवार होने के कारण यात्रियों की संख्या और बढ़ गई, क्योंकि रविवार को अवकाश था।
- अनारक्षित ट्रेनों की कमी: जनरल टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों की संख्या हजारों में थी, लेकिन उनके लिए समय पर अनारक्षित ट्रेनें नहीं चलाई गईं, जिससे भीड़ बेकाबू हो गई।
- प्रशासन की लापरवाही: रेलवे अधिकारियों के अनुसार, प्रयागराज जाने के लिए अनारक्षित टिकट खरीदने वालों की संख्या बढ़ने पर ऑपरेशन डिपार्टमेंट से और अनारक्षित ट्रेनें चलाने की मांग की गई थी, लेकिन हादसे से पहले तक कुंभ के लिए स्पेशल अनारक्षित ट्रेनों का संचालन नहीं हो पाया था।
कुंभ में स्नान करने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग दिल्ली से प्रयागराज जा रहे हैं। ऐसे यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे की तरफ से स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जाती हैं। शनिवार और रविवार को बड़ी संख्या में लोगों का अवकाश होता है। ऐसे में शुक्रवार और शनिवार को बड़ी संख्या में लोग कुंभ स्नान के लिए निकलते हैं।
एक रेलवे अधिकारी ने बताया कि शनिवार को कुंभ जाने वाले यात्रियों की संख्या ज्यादा थी, क्योंकि रविवार को अवकाश था। नई दिल्ली स्टेशन पर शनिवार को 8.5 हजार से अधिक लोगों ने जनरल टिकट लिया। इन यात्रियों को जनरल कोच में बैठकर सफर करना था। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर भी अनारक्षित ट्रेनें नहीं चलाई गईं। शनिवार को सिर्फ सुबह के समय ही प्रयागराज के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई गई थी।
हादसे से पहले जनरल क्लास में अनारक्षित टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने के बाद भी रेलवे की तरफ से अनारक्षित ट्रेन नहीं चलाई गई। रेलवे अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज जाने के लिए अनारक्षित टिकट खरीदने वालों की संख्या बढ़ने पर ऑपरेशन डिपार्टमेंट से और अनारक्षित ट्रेनें चलाने की मांग की गई थी, लेकिन हादसे के पहले तक कुंभ के लिए स्पेशल अनारक्षित ट्रेनों का संचालन नहीं हो पाया था।
इस घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है। लेकिन, सवाल यह है कि क्या सिर्फ जांच और कार्रवाई से इस तरह के हादसों को रोका जा सकता है? क्या रेलवे प्रशासन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा?
इस हादसे ने एक बार फिर रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह जरूरी है कि रेलवे प्रशासन भीड़ नियंत्रण के लिए उचित व्यवस्था करे और यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करे।


