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नयी दिल्ली: अगर आप भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों में से एक, पूर्वोत्तर भारत, को देखना चाहते हैं, तो अब आपके पास एक बेहतरीन मौका है। भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) ने 22 अप्रैल से ‘भारत गौरव पर्यटक ट्रेन’ के माध्यम से एक शानदार यात्रा ‘पूर्वोत्तर की खोज’ शुरू करने की घोषणा की है। यह यात्रा, जो दो सफल पूर्वोत्तर यात्राओं के बाद आयोजित की जा रही है, एक बार फिर यात्रियों को उस क्षेत्र की अद्वितीय वादियों, सांस्कृतिक विविधताओं और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच ले जाएगी।
यात्रा की शुरुआत और मार्ग
इस यात्रा का आरंभ दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से होगा। आईआरसीटीसी के अनुसार, यह यात्रा लगभग 5800 किलोमीटर की होगी और यात्रा के दौरान यात्रियों को असम, त्रिपुरा, नागालैंड, मेघालय और अन्य राज्यों के प्रमुख स्थल दिखाए जाएंगे। गुवाहाटी, शिवसागर, जोरहाट और काजीरंगा (असम), उनाकोटी और उदयपुर (त्रिपुरा), दीमापुर और कोहिमा (नागालैंड) तथा शिलांग और चेरापूंजी (मेघालय) जैसे धार्मिक, साहसिक, वन्य जीवन और अन्य आकर्षक स्थल इस यात्रा के मुख्य आकर्षण होंगे।
यात्रा का उद्देश्य और अनुभव
‘पूर्वोत्तर की खोज’ यात्रा भारतीय संस्कृति और विविधता को करीब से समझने का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करती है। इस यात्रा के दौरान यात्रियों को न केवल पूर्वोत्तर भारत के मनोरम दृश्य देखने का मौका मिलेगा, बल्कि वहां के विभिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का दौरा भी किया जाएगा। ट्रिप के दौरान यात्रियों को नॉर्थ ईस्ट के पारंपरिक नृत्य, गीत, रीति-रिवाज, वन्य जीवन, और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का अनुभव होगा। यात्रा के सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया गया है, जिसमें नॉर्थ ईस्ट के खूबसूरत दृश्य और पारंपरिक नृत्य प्रदर्शित किए गए हैं।
यात्रा का समय और पैकेज
यह विशेष यात्रा 22 अप्रैल, 2025 को दिल्ली सफदरजंग रेलवे स्टेशन से शुरू होकर 14 रातों/15 दिनों की होगी। यात्रा के दौरान, यात्रियों को अत्याधुनिक वातानुकूलित डीलक्स पर्यटक ट्रेन में यात्रा करने का अवसर मिलेगा। इस ट्रेन में कुल 156 यात्री सफर कर सकेंगे। आईआरसीटीसी ने बताया कि यात्रियों को एसी प्रथम, एसी द्वितीय और एसी तृतीय श्रेणियों में यात्रा करने का विकल्प मिलेगा। ट्रेन की साज-सज्जा और आरामदेह वातावरण इस यात्रा को और भी खास बनाएंगे।
यात्रा की लागत
इस यात्रा की लागत श्रेणी अनुसार अलग-अलग है। वातानुकूलित प्रथम श्रेणी (कूपे) के लिए प्रति व्यक्ति 1 लाख 67 हजार 845 रुपये, वातानुकूलित प्रथम श्रेणी (केबिन) के लिए 1 लाख 49 हजार 815 रुपये, वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी के लिए 1 लाख 29 हजार 915 रुपये और वातानुकूलित तृतीय श्रेणी के लिए 1 लाख 16 हजार 905 रुपये की पैकेज है। यह यात्रा भारत के सबसे कम यात्रा वाले उत्तर-पूर्वी राज्यों में से पांच तक जाएगी, और इसमें जो अनुभव मिलेगा, वह यात्रियों के लिए अविस्मरणीय होगा।
यात्रियों के लिए सुविधा और चयन
यात्रा में यात्रा की सहूलियत और सुरक्षा का खास ध्यान रखा गया है। आईआरसीटीसी ने इस यात्रा को अधिक से अधिक यात्रियों के लिए सुलभ बनाने के लिए विभिन्न शहरों से ट्रेन में चढ़ने का विकल्प भी उपलब्ध कराया है। यात्री दिल्ली, गाजियाबाद, अलीगढ़, टूंडला, इटावा, कानपुर, लखनऊ और वाराणसी रेलवे स्टेशनों से ट्रेन में चढ़ने या उतरने का चयन कर सकते हैं।
यात्रा की विशेषताएँ
यह यात्रा भारतीय उपमहाद्वीप के नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र के भिन्न-भिन्न पहलुओं को उजागर करती है। असम के काजीरंगा नेशनल पार्क में वन्य जीवन देखने का अनुभव, त्रिपुरा के उनाकोटी के ऐतिहासिक स्थल, नागालैंड के दीमापुर और कोहिमा के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ मेघालय के शिलांग और चेरापूंजी के खूबसूरत दृश्य इस यात्रा को और भी आकर्षक बनाते हैं। इसके अलावा, पूर्वोत्तर भारत की परंपराएँ, वहां का रीति-रिवाज, खानपान और सांस्कृतिक कार्यक्रम यात्रियों को एक नई और अनूठी दुनिया का अनुभव प्रदान करेंगे।
आईआरसीटीसी के इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य न केवल पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि देश के उन क्षेत्रों की यात्रा को भी सुलभ बनाना है, जिनकी सांस्कृतिक और प्राकृतिक सुंदरता को कम ही लोग देख पाते हैं। इस यात्रा के माध्यम से भारतीय पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की भी उम्मीद है, साथ ही भारतीय नागरिकों को देश के भीतर के अनदेखे और अनजाने स्थानों को जानने का मौका मिलेगा।
यात्रा का महत्व
यह यात्रा सिर्फ एक पर्यटन यात्रा नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत की समृद्धता और विविधता को प्रदर्शित करने का एक मौका है। देश के इस हिस्से में ऐसी कई जगहें हैं, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध हैं। यह यात्रा यात्रियों को न केवल बाहरी सौंदर्य देखने का अवसर देगी, बल्कि उन्हें उस क्षेत्र की जीवनशैली, भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाजों और खानपान को समझने का भी मौका मिलेगा। इससे न केवल भारत के भीतर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि विदेशों में भी भारत के इस अद्वितीय हिस्से की पहचान बनेगी।
समाप्ति के रूप में, इस यात्रा को लेकर आईआरसीटीसी का उद्देश्य भारतीय नागरिकों को एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करना है, जिसमें वे न केवल पर्यटन का आनंद लेंगे, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के रहन-सहन, संस्कृति और परंपराओं को भी जानेंगे।
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