
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने चेन्नई के कोट्टूरपुरम स्थित अन्ना शताब्दी पुस्तकालय में पुरातत्व विभाग द्वारा प्रकाशित ‘लोहे की प्राचीनता’ पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कीझाड़ी ओपन एयर संग्रहालय और गंगईकोंडा चोलापुरम संग्रहालय की आधारशिला रखी और कीझाड़ी वेबसाइट का शुभारंभ किया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि तमिलनाडु में 5300 साल पहले लौह युग की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि तमिल भूमि पर लौह तकनीक का प्रादुर्भाव न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण मानवशास्त्रीय खोज है। पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खुदाई और शोध के परिणामों ने इस दावे को प्रमाणित किया है।
स्टालिन ने बताया कि खुदाई के दौरान मिले नमूनों को पुणे के बीरबल सागर पुरातत्व संस्थान, अहमदाबाद की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला और अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित बीटा प्रयोगशाला में भेजा गया था। इन संस्थानों ने रेडियोकार्बन डेटिंग और ओएसएल विश्लेषण के जरिए 4000 ईसा पूर्व से भी पहले के कालखंड में लोहे की शुरुआत की पुष्टि की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु में लोहे की शुरुआत का समय 5300 साल पहले का है। इन विश्लेषणों के परिणामों से यह भी स्पष्ट हुआ कि तमिलनाडु में शहरी सभ्यता और साक्षरता छठी शताब्दी ईसा पूर्व में आरंभ हुई थी। पोरुनई नदी के किनारे चावल की खेती 3200 साल पहले स्थापित हुई थी।
मुख्यमंत्री ने पुरातत्व विभाग की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से तमिलनाडु का इतिहास एक नई ऊंचाई पर पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास तमिलनाडु से ही लिखा जाना चाहिए और कीझाड़ी, मयिलादुम्पराई जैसे स्थलों की खोज ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ प्रदान किया है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में लौह अयस्क से लोहा निकालने की तकनीक का विकास न केवल राज्य बल्कि भारत और विश्व के लिए भी एक महान उपलब्धि है। स्टालिन ने इसे तमिलनाडु की ओर से दुनिया को एक विशेष उपहार बताया।
मुख्यमंत्री ने पुरातत्व विभाग से आगे भी खुदाई और शोध कार्य जारी रखने का अनुरोध किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि तमिलनाडु में हुई नई खोजें न केवल राज्य के बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं।
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