देशभर में फैला धर्मांतरण रैकेट: 68 करोड़ की फंडिंग, 3000 गुर्गे और एक खतरनाक मंसूबा

भारत न्यूज़ लाइव
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में धर्मांतरण के आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर से जुड़ी एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। ईडी को छांगुर से जुड़े 30 बैंक खातों का पता चला है, जिनमें से 18 खातों में 68 करोड़ रुपये के लेन-देन की जानकारी मिली है। हैरानी की बात यह है कि पिछले तीन महीनों के भीतर ही इन खातों में सात करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं। अधिकारियों को संदेह है कि यह धनराशि विदेशी फंडिंग नेटवर्क के माध्यम से भेजी गई है, जिसका उपयोग उत्तर प्रदेश के बलरामपुर और अन्य स्थानों पर धर्मांतरण तथा संपत्ति खरीदने के लिए किया गया। ईडी अब छांगुर के अन्य बैंक खातों, संपत्तियों और आयकर रिटर्न की गहराई से जांच कर रही है। इन खातों में कई गैर सरकारी संगठन, ट्रस्ट और निजी खाते शामिल हैं। ईडी संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।
जांच में सामने आया है कि छांगुर ने अपने नेटवर्क को वैध रूप देने के लिए चार अलग-अलग संस्थाएं बनाई थीं। उसने देश के 579 जिलों की पहचान कराई थी, जहां हिंदू बहुसंख्यक आबादी रहती है। इन जिलों में छांगुर ने एक संगठित रणनीति के तहत कार्य करना शुरू किया। उसने तीन हजार से अधिक युवाओं को अपने अनुयायी के रूप में तैयार कर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया। इन युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे लक्ष्य के अनुरूप धर्मांतरण की गतिविधियों को अंजाम दे सकें।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि छांगुर का सपना अपने बेटे महबूब को दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनाने का था। वह धर्मांतरण से प्राप्त धन का उपयोग कर प्रॉपर्टी खरीदने और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में निवेश कर रहा था। छांगुर चाहता था कि उसका बेटा न सिर्फ अमीर बने बल्कि पूरे नेटवर्क का अगला मुखिया भी वही हो।
एटीएस ने छांगुर की गिरफ्तारी के बाद उसके तीन प्रमुख सहयोगियों पर निगरानी तेज कर दी है। जानकारी के अनुसार, आजमगढ़ में छांगुर के दो सिपहसालार अब भी सक्रिय हैं और कार्रवाई की पल-पल की जानकारी रख रहे हैं। मधपुर और रेहरा माफी गांवों से भी अहम सुराग मिले हैं। एक शागिर्द गुपचुप तरीके से पुलिस और एटीएस की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है।
छांगुर ने प्रेमजाल के जरिए धर्मांतरण कराने के लिए एक हजार मुस्लिम युवकों की फौज तैयार की थी। ये युवक महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में फैले हुए थे। इन युवकों को पैसे देकर हिंदू लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फंसाने और फिर उनका धर्म परिवर्तन कराने का कार्य सौंपा गया था। इसका मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को भीतर से कमजोर करना और सामाजिक ढांचे को हिलाना था। नेपाल सीमा से सटे सात जिलों को विशेष रूप से टारगेट किया गया था, ताकि सीमावर्ती इलाकों के माध्यम से नेटवर्क को आसानी से संचालित किया जा सके।
जांच में छांगुर की सबसे करीबी सहयोगी नीतू रोहरा उर्फ नसरीन की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उसके बैंक खाते में पिछले चार महीने में 14 करोड़ रुपये जमा किए गए थे, जिन्हें जल्द ही निकाल लिया गया। इसके अलावा, उसके पति नवीन उर्फ जलालुद्दीन के खाते में भी 18 करोड़ रुपये की राशि जमा कराई गई है। ये फंड्स कहां से आए और किस उद्देश्य के लिए उपयोग किए गए, इस पर ईडी और एटीएस जांच कर रही है। यह संदेह जताया जा रहा है कि इन दोनों के माध्यम से छांगुर का नेटवर्क देशभर में फंड का वितरण कर रहा था।
छांगुर द्वारा बनाई गई संपत्तियां भी जांच के घेरे में हैं। बलरामपुर के मधपुर गांव में छांगुर की एक आलीशान हवेली है, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। यह हवेली अवैध तरीके से सरकारी जमीन पर बनाई गई थी। इसमें 70 कमरे, सीसीटीवी कैमरे, हाई वॉल्टेज सुरक्षा और आलीशान सुविधाएं थीं। प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर इस अवैध निर्माण को गिराना शुरू कर दिया है। वहीं, पुणे, लखनऊ, गोण्डा और अन्य शहरों में भी छांगुर और उसके ट्रस्ट के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि इन संपत्तियों की खरीद के पीछे हवाला और विदेशी चंदा मुख्य स्रोत रहे हैं।
इस पूरे नेटवर्क में एक खास बात सामने आई है कि छांगुर और उसके अनुयायी आपस में बातचीत के दौरान कोडवर्ड्स का इस्तेमाल करते थे। जैसे, “प्रोजेक्ट” का अर्थ होता था लक्षित महिला, “मिट्टी पलटना” यानी धर्म परिवर्तन, “काजल करना” यानी मानसिक रूप से प्रभावित करना, और “दीदार” का मतलब था मिलने की प्रक्रिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि छांगुर का नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध और सतर्क तरीके से संचालित हो रहा था।
वर्तमान में छांगुर और नीतू रोहरा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को लखनऊ से हिरासत में लिया गया और न्यायालय के आदेश पर पुलिस रिमांड में भेजा गया है। ईडी और एटीएस दोनों एजेंसियां उनसे लगातार पूछताछ कर रही हैं, ताकि इस नेटवर्क से जुड़ी हर कड़ी को जोड़ा जा सके। सरकार और जांच एजेंसियां इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही हैं, क्योंकि यह न सिर्फ अवैध धन के प्रयोग का मामला है, बल्कि यह राष्ट्र की एकता और सामाजिक सौहार्द्र के लिए भी एक बड़ा खतरा बन सकता है।
इस पूरी साजिश ने यह साफ कर दिया है कि किस तरह धर्म की आड़ में बड़े पैमाने पर आर्थिक अपराध किए जा रहे हैं। विदेशी धन के माध्यम से समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश की गई और देश की सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा करने वाले तत्वों को बढ़ावा मिला। जांच एजेंसियों की सतर्कता और सरकार की सक्रियता के चलते यह जाल समय रहते सामने आ गया, लेकिन अब देखना यह है कि आगे इस मामले में कितने और चेहरों का पर्दाफाश होता है और न्याय प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है।



