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मुरादाबाद: मुरादाबाद में पुलिस ने 2.74 लाख रुपये की जाली करेंसी के साथ आदिल और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया। नकली नोट छापने की इस साजिश के मास्टरमाइंड आदिल ने पुलिस पूछताछ में कई अहम खुलासे किए।
कैसे बना नकली नोटों का एक्सपर्ट?
आदिल ने खुलासा किया कि उसने शाहिद कपूर की वेब सीरीज ‘फर्जी‘ देखकर नकली नोट छापने का आइडिया लिया। उसने शुरुआत में A4 साइज के पेपर पर प्रिंटिंग की, लेकिन धीरे-धीरे कागज की गुणवत्ता सुधारते हुए ड्राइंग पेपर का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। करीब दो महीने की मेहनत और प्रयोग के बाद वह हूबहू असली जैसा दिखने वाला नकली नोट छापने में सफल हो गया।
गर्लफ्रेंड का घर बना ठिकाना
आदिल ने अपनी गर्लफ्रेंड के घर को जाली नोट छापने के लिए इस्तेमाल किया। यह घर मझोला के जयंतीपुर इलाके में स्थित है। पुलिस पूछताछ में आदिल ने दावा किया कि उसकी गर्लफ्रेंड, जो एक विधवा नर्स है, को इस काम की जानकारी नहीं थी। वह उसके अस्पताल जाने के बाद नोट छापता था।
नकली नोटों की खासियत
- नोट में मौजूद चमकीली स्ट्रिप के स्थान पर टेप का इस्तेमाल किया गया।
- नोट छापने के लिए एक सामान्य प्रिंटर का उपयोग किया गया।
- आदिल ने बाजार में अब तक करीब 3 लाख रुपये की नकली करेंसी खपा दी।
मीडिया में छिपाया असली चेहरा
आदिल ने अपनी पहचान छिपाने के लिए मीडिया का सहारा लिया। उसने प्रेस फोटोग्राफर बनकर मीडिया में खुद को घुल-मिलाया। यहां तक कि उसने कुछ अखबारों के लिए फोटोग्राफी का काम भी किया। यही कारण था कि जब आदिल पकड़ा गया, तो उसे छुड़ाने के लिए कुछ मीडिया वालों ने पैरवी की कोशिश की।
पुलिस का ऑपरेशन और गिरफ्तारियां
एसपी सिटी रणविजय सिंह ने बताया कि मझोला पुलिस ने जयंतीपुर इलाके में छापा मारकर आदिल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। उसके दो साथी, मोहम्मद नाजिम और शबाब अख्तर उर्फ राहुल, भी पकड़े गए।


- आदिल: जयंतीपुर का निवासी और मास्टरमाइंड
- नाजिम: नकली नोटों को गांव के बाजारों में खपाने वाला
- राहुल: नकली करेंसी की सप्लाई में शामिल
नकली नोटों का जाल
यह गिरोह गांवों और छोटे बाजारों में नकली नोट चलाने में सक्रिय था। नोट छापने और उन्हें खपाने का काम आदिल और उसके साथियों ने संगठित तरीके से किया।
पुलिस का बयान
एसपी सिटी ने कहा कि आदिल बेहद चालाक अपराधी है। उसने मीडिया का इस्तेमाल अपनी असलियत छिपाने के लिए किया। लेकिन पुलिस की सतर्कता से यह गिरोह अब सलाखों के पीछे है।
यह मामला नकली करेंसी के खतरे और समाज में इसके बढ़ते प्रभाव को उजागर करता है। पुलिस की इस कार्रवाई से नकली नोटों का एक बड़ा नेटवर्क खत्म हुआ है।
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