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पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने शिवसेना (यूबीटी) द्वारा लगाए गए आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की हार के लिए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने विधायकों की अयोग्यता के मामलों पर फैसला नहीं किया, जिससे राजनीतिक दल-बदल का मार्ग खुला रहा।
राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि “इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा।” चुनाव परिणामों में एमवीए के घटक दलों को करारी हार का सामना करना पड़ा। शिवसेना (यूबीटी) ने 94 में से केवल 20 सीटें जीतीं, कांग्रेस 101 में से 16 और एनसीपी (शरद पवार गुट) 86 में से केवल 10 सीटें ही जीत पाई।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, “हम पूरे वर्ष महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों पर काम कर रहे थे। क्या कोई पार्टी तय करेगी कि सुप्रीम कोर्ट को कौन सा मामला सुनना चाहिए? यह फैसला मुख्य न्यायाधीश का होता है।”
साल 2022 में शिवसेना में हुए विभाजन और एकनाथ शिंदे के विद्रोह के बाद एमवीए सरकार गिर गई थी। इसके बाद उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।
पूर्व सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में 20 साल से लंबित मामलों को प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने पूछा, “क्या कोई विशेष मामला, जो हाल में हुआ हो, पुराने मामलों से ज्यादा महत्वपूर्ण है? सुप्रीम कोर्ट को संतुलन बनाना होता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके कार्यकाल में 38 संवैधानिक पीठ के फैसले दिए, जिनमें नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए, अल्पसंख्यक अधिकार, और विकलांगता अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे।
राजनीतिक दबाव के आरोपों पर उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने कभी किसी पार्टी के दबाव में काम नहीं किया। हम अपने काम में स्वतंत्र हैं और किसी एजेंडा का पालन नहीं करते।


