इमरान प्रतापगढ़ी: शायरी से संसद तक का सफर, जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव से निकले इमरान प्रतापगढ़ी ने शायरी और राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है। हाल ही में केरल की दारुल हुदा इस्लामिक यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने अपने संघर्ष की कहानी सुनाई। उनकी प्रेरक यात्रा यह बताती है कि जब इंसान मेहनत और उम्मीद का दामन थाम ले, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।
शायरी से पहचान, राजनीति में असर
इमरान प्रतापगढ़ी ने बताया कि उनके परिवार की ख्वाहिश थी कि वह डॉक्टर बनें, लेकिन उनका दिल शायरी की ओर था। शुरुआती दिनों में उनकी यह रुचि कई लोगों को व्यर्थ लगी। मुशायरों में अपने शब्दों के माध्यम से उन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी महसूस किया। शायरी के जरिए इमरान ने इंसाफ और मुहब्बत की आवाज को बुलंद किया, जिसे लाखों लोगों ने सराहा।
राजनीति में कदम और समाज में बदलाव की कोशिश
इमरान ने शायरी के मंच से आगे बढ़कर राजनीति का दामन थामा। उनका मानना था कि सत्ता के गलियारों में खामोशी नहीं, बुलंद आवाज की जरूरत है। उन्होंने समाज में बदलाव के लिए संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इमरान का यह सफर युवाओं को यह संदेश देता है कि अगर किसी के पास जुनून और मेहनत करने का जज्बा हो, तो सफलता की राह खुद-ब-खुद बन जाती है।
छात्रों के लिए संदेश
इमरान ने छात्रों को अपने सपनों को ऊंचा रखने की सलाह दी। उनका कहना था कि अल्लाह जब किसी से काम लेना चाहता है, तो वह उसे साधनों की कमी के बावजूद सफलता दिला देता है। उन्होंने कहा, “मेहनत और हिम्मत से समंदर भी पार किए जा सकते हैं।”
इमरान प्रतापगढ़ी की यह कहानी इस बात की मिसाल है कि कैसे एक इंसान अपनी मेहनत और जुनून से जीवन में बदलाव ला सकता है। आप भी उनकी प्रेरणा से सीख लेकर अपने सपनों को सच कर सकते हैं।
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