बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण का खुलासा: जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और गैंग पर एटीएस-ईडी का शिकंजा

उत्तर प्रदेश l बलरामपुर में एक बड़े अवैध धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह का मास्टरमाइंड जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा है, जो सूफी संत के रूप में खुद को पेश करता था। अब एटीएस और ईडी ने उसके खिलाफ गंभीर जांच शुरू कर दी है। छांगुर और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को सात दिनों की एटीएस रिमांड पर भेजा गया है। इस दौरान हुई पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनसे स्पष्ट होता है कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित धर्मांतरण रैकेट से जुड़ा है।
छांगुर बाबा ने बलरामपुर में हर साल उर्स का आयोजन शुरू किया, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल होते थे। इस आयोजन को धर्मांतरण का मंच बना दिया गया। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के जरिए हिंदू युवकों और महिलाओं का ब्रेनवॉश किया जाता था। आयोजन में विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल होता था और लाखों रुपये खर्च किए जाते थे। उर्स में कई बार इस्लाम कबूल करने की घटनाएं सामने आईं हैं।
छांगुर खुद को “सूफी बासफा हजरत बाबा जलालुद्दीन” के रूप में पेश करता था और अपनी किताब “शिजर-ए-तैय्यबा” के जरिए लोगों को प्रभावित करता था। महिलाओं को फंसाने की ज़िम्मेदारी नीतू उर्फ नसरीन के पास थी, जो खुद को धार्मिक महिला के रूप में प्रस्तुत करती थी और इस्लाम कबूल करने के लिए प्रेरित करती थी।
उर्स के आयोजनों में सऊदी अरब समेत कई विदेशी मेहमान शामिल होते थे। छांगुर इन मेहमानों से व्यक्तिगत रूप से मिलता था और मंच से इनका प्रचार करता था, जिससे स्थानीय लोगों को यह विश्वास हो जाता था कि उसकी पहुंच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। यही प्रचार उसके गिरोह को वैधता का भ्रम देने में सफल रहा।
इस रैकेट का एक उदाहरण लखनऊ की गुंजा गुप्ता है, जो इस्लाम कबूल कर अलीना अंसारी बन गई। उसकी मुलाकात एक युवक अमित से हुई, जिसने बाद में खुद को अबू अंसारी बताया। प्रेम जाल में फंसाकर गुंजा को इस्लाम कबूल कराया गया और शादी कर ली गई। बताया जा रहा है कि अबू अंसारी, राजा उर्फ डॉ. अबू सईद और गुड़िया उर्फ उम्मे रकीबा जैसे कई लोग इस गिरोह का हिस्सा थे। इन सभी को हिंदू महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाकर धर्मांतरण कराने की ज़िम्मेदारी दी गई थी।
ईडी ने भी इस मामले में सक्रियता दिखाई है। नसरीन और उसके पति नवीन के आठ बैंक खातों की जांच की गई है, जिनमें करोड़ों रुपये के लेन-देन का खुलासा हुआ है। ईडी अब इन खातों के साथ-साथ गिरोह की अचल संपत्तियों की जांच में भी जुट गई है। बताया जा रहा है कि विदेशी फंडिंग के जरिए इस नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था।
एटीएस की पूछताछ में यह भी सामने आया है कि छांगुर ने अपने अनुयायियों का रजिस्टर तैयार कर रखा था, जिसमें करीब 4000 लोगों की जानकारी दर्ज है। इनमें से अधिकतर हिंदू धर्म से इस्लाम कबूल कर चुके हैं। एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) की जांच में सामने आया है कि नवीन रोहरा, नीतू रोहरा, समाले रोहरा, और पिंटू पांडेय जैसे कई लोग सक्रिय रूप से धर्मांतरण में शामिल थे।
छांगुर बाबा पर करीब 1500 युवतियों के धर्मांतरण कराने का आरोप है। लव जिहाद की रणनीति के तहत वह हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन करवा रहा था। बताया गया है कि वह युवाओं को मोबाइल में इस्लामिक कॉलर ट्यून लगाने की सलाह देता था, ताकि धीरे-धीरे वे धार्मिक माहौल में ढल जाएं। उसके यहां रोजाना सैकड़ों लोग ताबीज और दुआ लेने आते थे, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक होती थी। इन्हीं मुलाकातों के जरिए वह महिलाओं और लड़कियों को अपने जाल में फंसाता था।
अब ईडी और एटीएस की संयुक्त जांच इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने में लगी है। ईडी ने बलरामपुर पुलिस से अब तक की जांच रिपोर्ट मांगी है और आने वाले दिनों में रिमांड के दौरान और गहराई से पूछताछ की जाएगी। पुलिस और खुफिया एजेंसियों को छांगुर और उसके साथियों की विदेश यात्राओं, फंडिंग स्रोतों और संपत्तियों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं
बलरामपुर का यह मामला सिर्फ एक धर्मांतरण कांड नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की कहानी है, जिसमें लव जिहाद, विदेशी फंडिंग, ब्रेनवॉशिंग और सामाजिक ढांचे को नुकसान पहुँचाने की साजिश शामिल है। छांगुर बाबा और उसकी टीम ने धार्मिक आस्था को हथियार बनाकर हजारों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया। अब इस गिरोह पर कानून का शिकंजा कसता नजर आ रहा है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।



