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हैदराबाद के सरूरनगर स्थित एक अस्पताल में किडनी रैकेट का खुलासा होने के बाद राजधानी में सनसनी फैल गई है। इस अवैध गतिविधि का पर्दाफाश 21 जनवरी को रंगारेड्डी जिले के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वेंकटेश्वरलू को मिली गुप्त सूचना के आधार पर हुआ। डीसीपी प्रवीण कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने अस्पताल पर छापा मारा, जिसके बाद डॉक्टर और कर्मचारी मौके से फरार हो गए।
मामला सीआईडी को सौंपा गया
स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे सीआईडी को सौंपने की घोषणा की। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। शुरुआती जांच चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के डॉ. नागेंद्र के नेतृत्व में की गई थी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर सीआईडी को इस मामले की गहन जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
तीन राज्यों तक फैला नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ कि यह रैकेट केवल तेलंगाना तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्नाटक और तमिलनाडु से भी इसके तार जुड़े हुए हैं। तमिलनाडु की दो महिलाओं को एजेंटों ने हैदराबाद लाकर गरीबी का फायदा उठाते हुए उन्हें किडनी दान के लिए राजी किया। 17 जनवरी को किडनी प्रत्यारोपण किया गया, जिसमें प्राप्तकर्ताओं में एक वकील और कर्नाटक की एक नर्स शामिल थीं। दानकर्ताओं को केवल चार लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि प्राप्तकर्ताओं से 55 लाख रुपये प्रति प्रत्यारोपण वसूले गए।
कैसे हुआ पर्दाफाश?
गुप्त सूचना मिलने के बाद छापेमारी के दौरान अस्पताल में अवैध प्रत्यारोपण के प्रमाण मिले। चार व्यक्तियों, जिनमें दो दानकर्ता और दो प्राप्तकर्ता शामिल थे, को गिरफ्तार कर गांधी अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण के लिए ले जाया गया। इन परीक्षणों में प्रत्यारोपण की पुष्टि हुई।
मुखबिर की पहचान और सबूत जुटाने की कोशिश
जांचकर्ता अब उस गुमनाम मुखबिर की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसने इस रैकेट की जानकारी दी। ऐसा माना जा रहा है कि मुखबिर के पास इस नेटवर्क के खिलाफ महत्वपूर्ण सबूत हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह रैकेट कई सालों से संचालित हो रहा था।
अवैध सर्जरी का संचालन और खामियां
विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी जैसे अंगों के प्रत्यारोपण के लिए प्रशिक्षित सर्जन, उन्नत ऑपरेशन थिएटर और प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। जांच में पाया गया कि जिस अस्पताल में यह अवैध रैकेट चलाया जा रहा था, वहां नौ बिस्तरों की अनुमति थी, लेकिन अवैध रूप से चार मंजिलों में 30 बिस्तरों की सुविधा बनाई गई थी।
अंगों की बढ़ती मांग और गिरोह का फायदा
तेलंगाना में कानूनी रूप से अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया के लिए अस्पतालों को लाइफ डोनेशन ट्रस्ट से संबद्ध होना अनिवार्य है। वर्तमान में 41 स्वीकृत अस्पतालों में 15,722 मरीज अंगों के इंतजार में हैं। इनमें 7,667 किडनी के लिए और 7,146 लीवर के लिए पंजीकृत हैं। लंबी प्रतीक्षा अवधि के कारण कुछ मरीज अंग प्राप्त करने से पहले ही मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। इसी का फायदा अवैध गिरोह उठाते हैं।
चेन्नई के डॉक्टर की भूमिका
जांच में यह भी सामने आया कि चेन्नई के एक डॉक्टर ने अवैध सर्जरी में मुख्य भूमिका निभाई। पुलिस ने तमिलनाडु और कर्नाटक के आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अविनाश नाम का एक डॉक्टर भी शामिल है, जिसने बिचौलिए की भूमिका निभाई और गिरोह तथा अस्पताल के एमडी सुमंत के बीच संबंध बनाए।
गिरोह की साजिश और ऑपरेशन का तरीका
अस्पताल के एमडी सुमंत ने कजाकिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई की थी और सात महीने पहले अस्पताल की स्थापना की। रिपोर्ट के अनुसार, गिरोह ने सौदों को अंतिम रूप देने के लिए बेंगलुरु में बैठकें कीं और प्राप्तकर्ताओं से बड़ी धनराशि वसूली। तमिलनाडु की महिलाओं को वित्तीय सहायता का झांसा देकर हैदराबाद लाया गया और किडनी दान के लिए राजी किया गया।
हैदराबाद और अवैध अंग व्यापार का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब हैदराबाद का नाम अवैध अंग व्यापार से जुड़ा है। पूर्व में यहां से दानकर्ताओं को प्रत्यारोपण के लिए श्रीलंका और ईरान भेजने के मामले सामने आ चुके हैं। यह संकेत करता है कि शहर में इस तरह की गतिविधियों का पुराना इतिहास है।
आगे की जांच और कार्रवाई
पुलिस और सीआईडी की टीमें अब इस रैकेट में शामिल सभी लोगों की पहचान करने और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने में जुटी हैं। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य विभाग की खामियों को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि किस तरह संगठित गिरोह कानून और प्रशासन को चकमा देकर इस तरह के गंभीर अपराधों को अंजाम देते हैं।
निष्कर्ष
किडनी रैकेट का यह मामला तेलंगाना और आसपास के राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और कानून लागू करने की आवश्यकता को दर्शाता है। यह घटना न केवल चिकित्सा पेशे की गरिमा को चोट पहुंचाती है, बल्कि समाज में भरोसे की भावना को भी कमजोर करती है। इस घटना के बाद उम्मीद है कि राज्य और केंद्र सरकार अवैध अंग व्यापार रोकने के लिए सख्त कदम उठाएगी।
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