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श्रम सुधार 2025: असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा

एडिटर ,भारत न्यूज़ लाइव

केंद्र सरकार 2025 में लाखों असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को नए श्रम कानूनों का तोहफा देने की योजना बना रही है, जिसमें गिग और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म श्रमिकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सुधारों का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है और यह वर्ष के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।

चार प्रमुख श्रम संहिताओं पर प्रगति

श्रम मंत्रालय को उम्मीद है कि 31 मार्च, 2025 तक चार श्रम संहिताओं के मसौदा नियमों पर सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच आम सहमति बन जाएगी। प्रमुख सुधारों में एकल पंजीकरण, एकीकृत रिटर्न और पाँच साल की कंपनी-आधारित लाइसेंस वैधता शामिल है।

भविष्य के लिए तैयार कार्यबल पर ध्यान

केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने समावेशी और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण पर जोर दिया। 2024 में EPFO ​​और ESIC IT सिस्टम में महत्वपूर्ण प्रगति ने शिकायत निवारण को सुव्यवस्थित किया है।

गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा

गिग वर्कर्स के बढ़ते महत्व को स्वीकार करते हुए, सरकार अपने मुख्य एजेंडे के हिस्से के रूप में उनकी सामाजिक सुरक्षा चिंताओं को संबोधित कर रही है। गिग वर्कर्स, जिन्हें मुख्य रूप से प्रति कार्य भुगतान किया जाता है, को नए सुधारों से काफी लाभ होगा।

श्रम कानूनों का त्वरित कार्यान्वयन

डॉ. मंडाविया ने श्रम संहिताओं के त्वरित कार्यान्वयन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। इनमें सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध, मजदूरी और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां (OSH) शामिल हैं। राष्ट्रव्यापी प्रवर्तन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय आवश्यक है क्योंकि श्रम एक समवर्ती विषय है।

मार्च 2025: एकीकृत श्रम सुधारों की ओर महत्वपूर्ण कदम
श्रम मंत्रालय ने चार श्रम संहिताओं के मसौदा नियमों पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए 31 मार्च, 2025 की समयसीमा तय की है। ये संहिताएं निम्नलिखित हैं:

  • सामाजिक सुरक्षा संहिता: असंगठित और गिग श्रमिकों के लिए भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएं प्रदान करने का लक्ष्य।
  • मजदूरी संहिता: मजदूरी ढांचे को सरल बनाना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना।
  • औद्योगिक संबंध संहिता: विवाद समाधान को सरल बनाना और नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों को सुदृढ़ करना।
  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति (OSH) संहिता: कार्यस्थल की सुरक्षा और कल्याण के मानकों को स्थापित करना।

एक बार समन्वय स्थापित हो जाने के बाद, राज्यों द्वारा इन नियमों को अधिसूचित किया जाएगा, जिससे देशभर में इनका एक समान अनुपालन सुनिश्चित होगा।

व्यवसायों और श्रमिकों के लिए सुधार
इन सुधारों की मुख्य विशेषताएं हैं:

  • व्यवसायों के लिए सिंगल-विंडो पंजीकरण प्रणाली, जिससे कागजी कार्रवाई कम होगी।
  • नियामक अनुपालन के लिए एकीकृत रिटर्न।
  • लंबे समय तक वैधता वाले लाइसेंस, जिससे कंपनियों के संचालन में सरलता होगी।

ये बदलाव उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम करने के साथ-साथ श्रमिकों के अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

गिग श्रमिकों पर विशेष ध्यान
गिग और प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार में वृद्धि के साथ, सरकार उनकी नौकरी की सुरक्षा और लाभों की कमजोरियों को स्वीकार करती है। नए सुधारों का उद्देश्य इस अंतर को पाटना है और स्वास्थ्य देखभाल, बीमा और सेवानिवृत्ति लाभ जैसी आवश्यक सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना है।

सामूहिक प्रयास
श्रम सुधारों को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय आवश्यक है। चूंकि श्रम समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए दोनों को नियमों और विनियमों को अधिसूचित करने के लिए साथ मिलकर काम करना होगा। मंत्रालय इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए राज्य सरकारों के साथ सक्रिय रूप से संपर्क कर रहा है।

2025 और उससे आगे की दृष्टि
डॉ. मंडाविया ने जोर देकर कहा कि ये सुधार एक मजबूत श्रम प्रणाली बनाने की दिशा में एक कदम हैं, जहां सभी क्षेत्रों के श्रमिक सशक्त बनें और राष्ट्रीय विकास में योगदान दें। सरकार की दृष्टि में समावेशिता को बढ़ावा देना, सभी श्रमिकों के साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करना और भारत के कार्यबल को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना शामिल है।

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