देहरादून: बैंक लॉकर से लाखों के गहने गायब, बुजुर्ग महिला ने की शिकायत

भारत न्यूज़ लाइव
देहरादून के कोतवाली डालनवाला क्षेत्र में एक बैंक के मुख्य शाखा के लॉकर से लाखों रुपये के गहने गायब होने का मामला सामने आया है। 86 वर्षीय बुजुर्ग महिला सुशीला देवी ने अपने गहनों के चोरी होने की शिकायत एसएसपी से की है। उनकी शिकायत पर पुलिस ने वर्तमान शाखा प्रबंधक, क्षेत्रीय प्रबंधक, अन्य कर्मचारियों और पूर्व प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शुरुआत में लॉकर लेने का निर्णय
सुशीला देवी, जो घोसी गली की निवासी हैं, ने शिकायत में बताया कि 1995 में उन्होंने अपने और अपने बेटे अनूप कुमार के नाम से बैंक की ओल्ड सर्वे रोड स्थित मुख्य शाखा में बचत खाता खोला था। खाता खोलते समय बैंक कर्मचारियों ने उन्हें लॉकर की सुविधा लेने का सुझाव दिया, ताकि उनके गहने सुरक्षित रह सकें। सहमति के बाद उन्हें लॉकर नंबर 38 आवंटित किया गया और एक चाबी भी दी गई।
गहनों को सुरक्षित रखने का भरोसा
1995 से 2018 के बीच सुशीला देवी ने अपने गहने और अन्य दस्तावेज बैंक लॉकर में रखे। उनके अनुसार, उस दौरान लॉकर में करीब 55 लाख रुपये के सोने के गहने और एक लाख रुपये के चांदी के गहने रखे गए थे। इस अवधि में सुशीला देवी लॉकर का नियमित संचालन करती रहीं। हालांकि, 2018 के बाद बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्होंने लॉकर का इस्तेमाल बंद कर दिया।
2022 में लॉकर तोड़ने का दावा
सुशीला देवी के बेटे अनूप कुमार ने 26 नवंबर 2024 को बैंक जाकर गहने प्राप्त करने की कोशिश की। इस दौरान बैंक कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि 2022 में उनके लॉकर को तोड़ दिया गया था। बिना किसी पूर्व सूचना के ऐसा करने का कारण पूछने पर बैंक ने यह स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया बैंक के प्रोटोकॉल के अनुसार की गई थी। लॉकर तोड़ने के दौरान शाखा प्रबंधक, बैंक अधिवक्ता, गहनों के मूल्यांकनकर्ता और दो स्वतंत्र गवाह मौजूद थे।
बैंक अधिकारियों ने अनूप कुमार को बताया कि उनके गहने सुरक्षित हैं और चालान बनाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। इसके बाद अनूप को अगले दिन आकर अपने गहने लेने के लिए कहा गया।
गहनों के गायब होने का खुलासा
27 नवंबर को अनूप कुमार दोबारा बैंक पहुंचे, लेकिन बैंक अधिकारियों ने गहने देने से इनकार कर दिया और उन्हें 28 नवंबर को आने को कहा। जब अनूप ने लॉकर तोड़ने से संबंधित बैंक पत्रावली देखने की मांग की, तो उन्हें किसी भी प्रकार की जानकारी या दस्तावेज दिखाने से मना कर दिया गया।
29 नवंबर को अनूप कुमार फिर बैंक पहुंचे, लेकिन इस बार बैंक ने चौंकाने वाली जानकारी दी कि गहने चोरी हो चुके हैं।
कानूनी कार्रवाई की शुरुआत
इस घटना के बाद सुशीला देवी ने 12 दिसंबर 2024 को बैंक अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा। लेकिन बैंक ने इसका कोई उत्तर नहीं दिया। आखिरकार, उन्होंने एसएसपी से संपर्क कर मामले की शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने सुशीला देवी की शिकायत पर वर्तमान शाखा प्रबंधक मोहित कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक अरविंद जोशी, अन्य सहकर्मियों और पूर्व प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कोतवाली डालनवाला प्रभारी मनोज मैनवाल ने बताया कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
महत्वपूर्ण सवाल और बैंक की भूमिका
इस घटना ने बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा और ग्राहकों के विश्वास पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लॉकर जैसी सुविधा ग्राहकों को उनके कीमती सामान की सुरक्षा के लिए प्रदान की जाती है। यदि बैंक ही अपने ग्राहकों की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाए, तो यह उनकी साख पर बड़ा सवालिया निशान है।
इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्यों लॉकर तोड़ने से पहले ग्राहक को सूचित नहीं किया गया? क्यों गहनों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित नहीं की गई? और आखिरकार, गहने गायब कैसे हुए?
पुलिस जांच और न्याय की उम्मीद
फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच में बैंक अधिकारियों की भूमिका, लॉकर तोड़ने की प्रक्रिया, और गहनों के गायब होने की परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है। पीड़िता और उनके परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है।
यह मामला बैंकिंग सेवाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की आवश्यकता पर जोर देता है। ग्राहकों का भरोसा बनाए रखना बैंकिंग उद्योग के लिए सर्वोपरि है, और इस तरह की घटनाएं उस विश्वास को गहरी चोट पहुंचाती हैं।
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