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देहरादून l उत्तराखंड में हाल ही में हुई भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं से उत्पन्न भीषण आपदा का जायज़ा लेने के लिए आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी देहरादून पहुंचे। उन्होंने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक टीम से विस्तृत बैठक कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। प्रधानमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर स्थिति की गंभीरता को समझा।
आपदा से राज्य के कई ज़िले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिनमें हजारों लोग बेघर हो गए हैं, सड़कें और पुल ध्वस्त हो गए हैं और अनेक स्कूल व स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इस विकट परिस्थिति में प्रधानमंत्री जी ने उत्तराखंड के लिए केंद्र सरकार की ओर से ₹1200 करोड़ की वित्तीय सहायता पैकेज की घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि हर प्रभावित परिवार तक समय पर मदद पहुँचे और पुनर्वास कार्य तेजी से आगे बढ़े।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण कार्यों में बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बेघर हुए लोगों के लिए पक्के घरों का निर्माण, क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय राजमार्गों, पुलों और सड़कों का पुनर्निर्माण, स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं की बहाली, तथा पशुपालन से जुड़े किसानों को विशेष सहायता प्रदान करना शामिल है। उन्होंने कहा कि यह आपदा केवल घरों और सड़कों की नहीं बल्कि आम लोगों की आजीविका की भी हानि है, जिसे बहाल करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।

इस मौके पर प्रधानमंत्री जी ने मृतकों के परिजनों के लिए ₹2 लाख की अनुग्रह राशि और घायलों के लिए ₹50,000 की आर्थिक सहायता की घोषणा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि आपदा में जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया है, उन्हें पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के अंतर्गत दीर्घकालिक सहयोग और सुरक्षित भविष्य की गारंटी दी जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि उत्तराखंड एक देवभूमि है, और यहां के लोगों की अटूट आस्था व धैर्य हमेशा देश को प्रेरणा देता है। ऐसे कठिन समय में केंद्र सरकार प्रदेशवासियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि राहत सामग्री का वितरण पारदर्शी ढंग से हो और किसी भी प्रभावित परिवार तक मदद पहुँचने में देरी न हो।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने आपदा प्रबंधन टीमों, एनडीआरएफ, सेना और स्थानीय प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन की इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य और केंद्र मिलकर एक दीर्घकालिक रणनीति बनाएंगे, जिससे भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
प्रधानमंत्री की इस घोषणा और आश्वासन से प्रदेशवासियों में उम्मीद और विश्वास की नई किरण जगी है। अब राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और पुनर्निर्माण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाएगी



