रेलवे (संशोधन) बिल 2024: विपक्ष ने निजीकरण और वरिष्ठ नागरिकों के भत्ते पर उठाए सवाल

भारत न्यूज़ लाइव
बुधवार को लोकसभा में रेलवे (संशोधन) बिल 2024 पर बहस के दौरान विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार से भारतीय रेलवे के निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाई। उनका कहना था कि इससे गरीब लोगों के हितों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए यात्रा भत्ते को फिर से बहाल करने की मांग की। समाजवादी पार्टी के नेता नीरज मौर्या ने कहा कि इस बिल को संसद की एक सर्वदलीय समिति को भेजा जाना चाहिए था ताकि सभी पक्षों पर विचार किया जा सके।
रेलवे बोर्ड की निगरानी पर सवाल
नीरज मौर्या ने यह भी कहा कि सरकार को रेलवे बोर्ड के कार्यों की निगरानी करने के उपायों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है और इसे निजीकरण की दिशा में न ले जाया जाए।
वरिष्ठ नागरिकों के भत्ते की बहाली की मांग
तृणमूल कांग्रेस के सांसद बापी हलदार ने कोविड-19 के दौरान वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेलवे टिकट भत्ते को वापस करने की मांग की, जिसे महामारी के दौरान समाप्त कर दिया गया था।
रेलवे मंत्री का पक्ष: प्रभावशीलता में सुधार की उम्मीद
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा कि इसके पारित होने के बाद भारतीय रेलवे की कार्यक्षमता में सुधार होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस बिल के माध्यम से रेलवे की कानूनी व्यवस्था को सरल बनाया जाएगा, जिससे दो अलग-अलग कानूनों के बीच भ्रम की स्थिति समाप्त होगी।
रेल बजट में वृद्धि: सुरक्षा में सुधार
वैष्णव ने यह भी बताया कि यूपीए शासन के दौरान 171 रेलवे दुर्घटनाएँ हुई थीं, जबकि 2023-24 में यह संख्या घटकर 40 रह गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष अब तक 29 दुर्घटनाएँ हुई हैं। इसके अलावा, रेलवे बजट को 2014 में 29,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.52 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
संशोधन बिल का उद्देश्य: कानूनी ढांचे को सरल बनाना
रेलवे (संशोधन) बिल 2024 का उद्देश्य भारतीय रेलवे बोर्ड अधिनियम, 1905 के प्रस्तावों को रेल अधिनियम, 1989 में शामिल करना है, जिससे कानूनी ढांचे को सरल और प्रभावी बनाया जा सके।


