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भारत में इस शादी के सीजन में खर्च में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वेडिंग प्लानिंग फर्म WedMeGood की रिपोर्ट के अनुसार, औसत शादी का बजट ₹36.5 लाख तक पहुंच गया है, जबकि डेस्टिनेशन वेडिंग का औसत बजट ₹51 लाख हो गया है। यह 2023 की तुलना में 7% की वृद्धि को दर्शाता है।
बढ़ती लागत: स्थल और खानपान पर सबसे ज्यादा खर्च
शादी के खर्च में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी वेन्यू और कैटरिंग में हुई है, जिनकी लागत में सालाना 10% से अधिक की वृद्धि हुई है। WedMeGood के सह-संस्थापक शशांक गुप्ता का कहना है, “आज हर कोई अपनी शादी को बेहतरीन बनाना चाहता है। वेन्यू, खानपान और प्लानिंग एजेंसी पर सबसे ज्यादा खर्च किया जा रहा है। भारतीय घरों में शादी और घर खरीदना सबसे बड़े खर्चों में गिना जाता है।”
डेस्टिनेशन वेडिंग्स और करोड़ों का बजट
डेस्टिनेशन वेडिंग्स, जिनका बजट ₹1 करोड़ से अधिक होता है, अब हाई-प्रोफाइल शादियों का हिस्सा बन चुकी हैं। ये ट्रेंड सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट्स के चलते और लोकप्रिय हो रहा है।
WedMeGood की सह-संस्थापक मेहक सागर शाहानी कहती हैं, “शादियों का स्वरूप बदल गया है। लोग अब अनुभवों पर खर्च कर रहे हैं। जेन-जेड कपल्स कॉकटेल मिक्सिंग, गेमिंग सेशन, और थीम-आधारित वेलकम डिनर जैसी गतिविधियां शामिल कर रहे हैं। ये एक पश्चिमी अवधारणा है, लेकिन भारतीय शादियों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।”
शादियों से 6 लाख करोड़ का व्यापार
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का अनुमान है कि नवंबर और दिसंबर में लगभग 48 लाख शादियां होंगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में ₹6 लाख करोड़ का योगदान होगा।
सोशल मीडिया का प्रभाव
इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने शादी के खर्च को और बढ़ावा दिया है। “इंस्टाग्रामेबल” फोटोज की चाहत ने वेडिंग इंडस्ट्री में नए बिजनेस और सेवाओं को जन्म दिया है।
अधिक शुभ मुहूर्त और बढ़ती बिक्री
इस साल शुभ विवाह मुहूर्त अधिक होने के कारण बाजार में बिक्री भी बढ़ी है। अधिकांश कपल्स और परिवार अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक बचत का इस्तेमाल कर इन शादियों को फंड कर रहे हैं।
निष्कर्ष: शादी का बदलता रूप
भारतीय शादियों में परंपराओं के साथ-साथ आधुनिकता और व्यक्तिगत अनुभवों को महत्व दिया जा रहा है। खर्च में बढ़ोतरी न केवल सामाजिक बदलाव का संकेत है, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।


